विश्व डेंगू दिवस हर साल 15 जून को मनाया जाता है. डेंगू को लेकर भारत में ज्यादातर लोगों को सही जानकारी नहीं पता होती. लोग बचाव में कई ऐसी कमियां छोड़ देते हैं कि हालात जानलेवा तक बन जाते हैं. दिल्ली नगर निगम में डॉक्टर अजय कुमार बताते हैं कि डेंगू अधिकतर लोगों में खतरनाक नहीं होता. पर अगर किसी मरीज को इसका शॉक सिंड्रोम अपनी चपेट में ले लेता है तो कंडीशन जान जाने की भी बन जाती है. वर्ल्ड डेंगू डे के मौके पर हम आपको इस आर्टिकल में इससे जुड़े शॉक सिंड्रोम की जरूरी जानकारी बताने जा रहे हैं.
डॉक्टर अजय ने टीवी9 से खास बातचीत में बताया कि डेंगू की चपेट में आने पर 90 फीसदी लोगों में इसके लक्षण नजर आते हैं. दवा और सही इलाज के बाद वो ठीक भी हो जाते हैं. एक्सपर्ट ने बताया कि अगर शॉक सिंड्रोम हो जाए तो दिक्कतें दोगुनी हो जाती हैं. प्लेटलेट्स तेजी से गिरती हैं और मरीज की जान खतरे में आ जाती है. चलिए आपको बताते हैं कि ये कंडीशन क्या होती है?
क्या होता है डेंगू शॉक सिंड्रोम । Dengue Shock Syndromeडॉक्टर अजय ने बताया डेंगू शॉक सिंड्रोम तब होता है जब वायरस खून की नलियों को कमजोर करने लगता है. ऐसे में ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगता है. इतना ही नहीं शरीर के अंगों तक खून की सप्लाई रुक जाती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि इस कारण मल्टीपल ऑर्गन फेल होने लगते हैं और मौत के हालात बन जाते हैं.
कैसे होती है इसकी शुरुआतडॉ. ने बताया कि ये शॉक सिंड्रोम एक दम से शुरू नहीं होता है. पहले हल्का बुखार चढ़ता है और इसे नजरअंदाज करना ही सबसे बड़ी गलती है. लोग लक्षण नजर आने के बाद भी डेंगू से जुड़ी जांच नहीं कराते. इस बीच बुखार तेजी से बढ़ता है और तीन से चार दिन तक बना रहता है. इसमें बेचैनी, ठंड लगना, पेट दर्द, उल्टी और थकान महसूस होने जैसे लक्षण नजर आते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक ये शॉक सिंड्रोम के लक्षण है. इस कंडीशन में बीपी तेजी से गिरने लगे और नाक-मसूड़ों से खून आने लगे तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए.
शॉक सिंड्रोम में विल पावर बिगड़ने लगती है. इसमें खून की नलियां डैमेज होती है और ये वजह जानलेवा बन जाती है. ऐसा भी कहा जाता है कि डेंगू के होने पर लोगों की मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है. प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं. इसलिए कहा जाता है कि मरीज और उसके परिवार को पैनिक नहीं होना चाहिए.
इन तरीकों से करें बचाव