टीचर्स के लिए अनिवार्य TET… केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग, GSTA ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखा लेटर
TV9 Bharatvarsh June 15, 2026 09:43 PM

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए टीचर्स एलिजिबिजिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य कर दिया है. टीचर्स को TET पास करने के लिए एक निर्धारित समय दिया गया है. ऐसा करने पर शिक्षकों की नौकरी और प्रमोशन पर संकट आ जाएगा. ऐसे में बड़े समय से शिक्षक संगठन अनिवार्य TET के विरोध में मोर्चा खोले हुए हैं. तो वहीं सुप्रीम कोर्ट रियायत देने से मना कर चुका है. इस बीच गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को एक लेटर लिखा है, जिसमें शिक्षकों के लिए अनिवार्य TET के मामले पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है.

आइए, जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? GSTA ने शिक्षकों के लिए अनिवार्य TET के मामले में केंद्र सरकार से क्या मांग की है. मसलन, जानेंगे कि केंद्रीय शिक्षा मंंत्री को लेटर लिखकर GSTA ने क्या मांग रखी है.

शिक्षकों को राहत देने के लिए विधायी हस्तक्षेप की मांग

GSTA ने शिक्षकों को अनिवार्य TET से राहत देने के लिए विधायी हस्तक्षेप की मांग की है. साथ ही GSTA ने इस विषय पर शिक्षकों की चिंताओं से अवगत कराने हेतु शीघ्र बैठक का समय भी मांगा है. GSTA महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि दिल्ली सहित देशभर में हजारों शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति उस समय लागू भर्ती नियमों एवं पात्रता शर्तों के अनुरूप विधिवत हुई थी. यादव ने कहा कि ऐसे शिक्षकों ने सालों तक संतोषजनक सेवा के साथ ही उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणाम दिया है. इसके बावजूद उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना अव्यावहारिक और अन्याय है.

शिक्षकों को TET के लिए बाध्य नहीं किया जाता

GSTA महासचिव अजय वीर यादव ने कहा किकिसी भी सरकारी सेवा में नियुक्ति के सालों बाद कर्मचारियों को अपनी मूल पात्रता दोबारा सिद्ध करने के लिए सामान्यतः बाध्य नहीं किया जाता. सेवा की निरंतरता का आधार कार्य निष्पादन, आचरण एवं दक्षता होती है, न कि बार-बार पात्रता परीक्षाओं से गुजरना. ऐसे में शिक्षकों के साथ भिन्न व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता.

GSTA महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि यह केवल शिक्षकों का नहीं बल्कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता का प्रश्न है. अनुभवी शिक्षकों के भविष्य को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता का प्रतिकूल प्रभाव विद्यालयी शिक्षा, प्रशासन तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों पर पड़ सकता है.

केंद्र सरकार दे ऐसे शिक्षकों को संरक्षण

GSTA महासचिव अजय वीर यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि संसद अथवा सक्षम विधायी माध्यम से ऐसे शिक्षकों को संरक्षण प्रदान किया जाए, जिनकी नियुक्ति उस समय के वैध भर्ती नियमों के अनुरूप हुई थी. साथ ही, सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए एकमुश्त विशेष छूट अथवा उपयुक्त वैधानिक व्यवस्था पर विचार किया जाए.

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