अशोक गहलोत के 'भाजपा पर प्रतिबंध' से जुड़े बयान पर आठवले का पलटवार, 'यह लोकतंत्र के खिलाफ'
Indias News Hindi June 15, 2026 10:43 PM

Mumbai , 15 जून . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और Rajasthan के पूर्व Chief Minister अशोक गहलोत के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बयान पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

आठवले ने से बातचीत में गहलोत के बयान को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि एक पूर्व Chief Minister के रूप में उन्हें इस प्रकार की टिप्पणी करने से बचना चाहिए. गहलोत का कहना कि यदि पूर्व Prime Minister इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं, लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली पार्टी है और Prime Minister मोदी सभी वर्गों को साथ लेकर देश के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं.

अशोक गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भाजपा धर्म के मुद्दे को आधार बनाकर देश में धार्मिक ध्रुवीकरण कर रही है और इससे राष्ट्र कमजोर हो रहा है. इस पर पलटवार करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि India विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का देश है, जहां सभी समुदायों के लोग अपने-अपने धर्म और परंपराओं के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा से समाज को बांटने वाली रही है और उसकी नीतियों में ‘बांटो और राज करो’ की मानसिकता दिखाई देती है. भाजपा सभी धर्मों और वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है.

इस बीच, पश्चिम बंगाल की सियासत और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों के नई Political राह चुनने के मुद्दे पर भी रामदास आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक Political पार्टी के साथ जाने का फैसला किया है.

आठवले ने कहा कि उन्हें अधिक खुशी होती यदि ये नेता रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) में शामिल होते, क्योंकि उनकी पार्टी मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में मान्यता प्राप्त है. यदि ये नेता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से जुड़ी पार्टी में आते तो यह बेहतर होता, लेकिन उन्होंने त्रिपुरा की पार्टी और एनडीए के साथ जाने का निर्णय लिया है, जिसका वह स्वागत करते हैं.

महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भी आठवले ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि Samajwadi Party, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों के कारण लंबे समय तक महिला आरक्षण विधेयक अटका रहा, लेकिन अब इसके पारित होने की राह आसान हो सकती है.

एएसएच/एबीएम

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