PM Modi Slovakia Visit: यूरोप की कार फैक्ट्री है स्लोवाकिया, फिर गाड़ियों से देश का नाम गायब क्यों? जहां पहुंचे PM मोदी
TV9 Bharatvarsh June 15, 2026 10:43 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय देश स्लोवाकिया की यात्रा पर हैं. वो रविवार रात को राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मिले. स्लोवाकिया की आजादी के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री यहां पहुंचा है. यह दौरा कई मायने में खास है. स्लोवाकिया वो देश है जिसे यूरोप की कार फैक्ट्री कहा जाता है. 54 लाख आबादी वाला स्लोवाकिया हर साल 10 लाख कारें बनाता है.

जब स्लोवाकिया चेकोस्लोवाक समाजवादी गणराज्य का हिस्सा था, तब वहां बनने वाली कारें, पश्चिमी मानकों के अनुसार, घटिया, शोरगुल वाली, अधिक ईंधन खपत करने वाली और धीमी थीं. लेकिन 1989 की वेलवेट क्रांति के बाद जब कम्युनिस्ट शासकों को सत्ता से बेदखल कर दिया गया, तो फॉक्सवैगन ने 1991 में चेकोस्लोवाकियाई कार निर्माता स्कोडा में निवेश करना शुरू कर दिया. इसके बाद यहां कारों की मैन्युफैक्चरिंग का सिलसिला ऐसे शुरू हुआ कि यह यूरोप की कार फैक्ट्री कहा जाने लगा.

वर्तमान में यहां फॉक्सवैैगन, KIA, जगुआर, लैंड रोवर समेत कई नामी ब्रांड हैं. ये कंपनियां स्लोवाकिया में असेंबली प्लांट चलाती हैं, लेकिन डिज़ाइन, इंजीनियरिंग, ब्रांडिंग, और मुनाफ़ा सब कुछ मूल देशों में ही रहता है.

कार उद्योग स्लोवाकिया की GDP का 13% हिस्सा है.

क्यों नहीं लिखा होता मेड इन स्लोवाकिया?

स्लोवाकिया यूं ही नहीं यूरोप की कार फैक्ट्री कहा जाता है. यहांकार उद्योग स्लोवाकिया की GDP का 13% और औद्योगिक उत्पादन का 54% है. यह औद्योगिक निर्यात का 33% हिस्सा है.अब समझते हैं कारों पर देश का नाम क्यों नहीं लिखा जाता. यहां कई ब्रांड हैं. जैसे- फॉक्सवैगन जर्मन ब्रांड है. Kia दक्षिण कोरियाई और Jaguar Land Rover ब्रिटिश. Stellantis यूरोपीय-अमेरिकी. ये सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्लोवाकिया में असेंबली प्लांट चलाती हैं, लेकिन डिज़ाइन, इंजीनियरिंग, ब्रांडिंग, और मुनाफ़ा सब कुछ मूल देशों में ही रहता है.

रेंज रोवर.

यहां की कारों पर मेड इन स्लोवाकिया का लेबल नहीं होता. इसके पीछे कई कारण हैं. जैसे- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के तहत “Country of Origin” वह देश होता है जहां उत्पाद की मुख्य वैल्यू तैयार होती है, यानी जहां उसका दिमाग (रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डिजाइन और इंजीनियरिंग) है. स्लोवाकिया के प्लांट्स में बाहर से आए पुर्ज़े जोड़े जाते हैं. बैटरी सेल जैसे महंगे कलपुर्जों का 50% तक हिस्सा बाहर से आता है.

आसान भाषा में समझें तो स्लोवाकिया का एक हाथ है और सोचने वाला कोई और है. यही वजह है कि पूरी तरह से गाड़ियां और उसके पार्ट्स यहां न बनने के लिए इस पर मेड इन स्लोवाकिया का लेबल नहीं होता. कंपनियां भी देश की जगह ब्रांड को प्रभावशाली मानती हैं.

#WATCH | Bratislava | PM Narendra Modi meets Prime Minister of Slovakia Robert Fico at Bratislava Castle for their bilateral engagement

(Source: DD) pic.twitter.com/8sl2q7ZXpp

— ANI (@ANI) June 15, 2026

कैसे बना गढ़?

अब सवाल है कि स्लोवाकिया कारों की फैक्ट्री कैसे बन गया. इसकी सबसे बड़ी वजह है मजदूरी की लागत. यहां मजदूरी की लागत जर्मनी के मुकाबले महज़ 20% थी, इसीलिए बड़ी कंपनियां यहां आईं. इसके पीछे देश की भौगोलिक स्थिति का भी रोल रहा है क्योंकि यह देश यूरोप के बीचो-बीच है और बेहतरीन लॉजिस्टिक्स ने इसे निर्यात के लिए आदर्श बना दिया.

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