केप वर्दे के हीरो गोलकीपर वोज़िन्हा ने बताया, वीज़ा समस्या के कारण उनकी मां नहीं देख पाईं स्पेन के खिलाफ शानदार विश्व कप प्रदर्शन
अमित तिवारी June 17, 2026 12:23 AM

विश्व कप का एक भी पल मिस न करें


केप वर्दे के हीरो गोलकीपर वोज़िन्हा ने खुलासा किया कि वीज़ा संबंधी परेशानियों के कारण उनकी मां स्पेन के खिलाफ उनके ऐतिहासिक विश्व कप प्रदर्शन को नहीं देख पाईं।


केप वर्दे ने विश्व कप इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक किया जब उन्होंने दिग्गज टीम स्पेन को 0-0 की बराबरी पर रोके रखा। लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे एक भावनात्मक कहानी छिपी थी। मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में शानदार प्रदर्शन करने वाले अनुभवी गोलकीपर वोज़िन्हा ने बताया कि उनकी मां उनके करियर के सबसे अहम पल को लाइव देखने नहीं आ सकीं।


अटलांटा में ऐतिहासिक रात


अफ्रीकी फुटबॉल के लिए यह रात इतिहास में दर्ज हो गई। केप वर्दे ने अपने पहले पुरुष विश्व कप मुकाबले में यूरोपीय चैंपियन स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोककर सनसनी मचा दी। ब्लू शार्क्स ने उम्मीदों के विपरीत प्रदर्शन करते हुए स्टार खिलाड़ियों से भरी स्पेन टीम को अंक बांटने पर मजबूर किया। 40 वर्षीय वोज़िन्हा ने कई विश्वस्तरीय बचाव कर टूर्नामेंट की दावेदार टीम को गोल करने से रोके रखा।


वर्तमान में पुर्तगाल की सेकंड-टियर क्लब चावेस के लिए खेलने वाले इस अनुभवी गोलकीपर ने सात अहम बचाव कर क्लीन शीट बनाए रखी और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। हालांकि अटलांटा में अपने साथियों के साथ जश्न मनाते समय उनका मन उन लोगों के पास था जो इस गौरव को साझा करने नहीं आ सके।


वीज़ा समस्या से टूटा दिल


अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए वोज़िन्हा ने बताया कि पारिवारिक कठिनाइयों के कारण उनके परिजन अमेरिका नहीं आ पाए। उन्होंने कहा, “मैच के बाद मैं रो पड़ा क्योंकि बचपन में मैं अपने दादा-दादी के साथ बड़ा हुआ और वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। कुछ साल पहले उनका निधन हो गया। मेरी मां भी यहां नहीं आ सकीं क्योंकि वीज़ा की समस्या और उससे जुड़ी आर्थिक कठिनाइयों के कारण हम समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।”


करीबी रिश्तेदारों की अनुपस्थिति के बावजूद वोज़िन्हा ने अपने देश की सामूहिक उपलब्धि पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने कहा, “यह केप वर्दे के सभी लोगों के लिए धन्यवाद का संदेश है। हम इस परिणाम से बहुत खुश हैं; इस टीम के खिलाड़ियों ने इस पल को जीने के लिए बहुत मेहनत की है। यह गर्व और संतोष का दिन है।”


विश्व कप में नया रिकॉर्ड


वोज़िन्हा की उपस्थिति सिर्फ परिणाम के लिहाज से ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड पुस्तकों में भी दर्ज हो गई। 40 वर्ष और 12 दिन की उम्र में वे किसी देश के पहले विश्व कप मैच में खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने। विश्व कप इतिहास में उनसे अधिक उम्र में पदार्पण केवल मिस्र के दिग्गज इस्साम अल-हदारी ने किया था, जिन्होंने 2018 में 45 वर्ष और 161 दिन की उम्र में विश्व कप डेब्यू किया था।


अपने लंबे सफर पर विचार करते हुए वोज़िन्हा ने कहा, “मैं ‘मैन ऑफ द मैच’ बनने पर बहुत गर्व महसूस कर रहा हूं। मेरे लिए अपने देश का प्रतिनिधित्व करना सम्मान की बात है। हम बहुत छोटे देश से हैं और हमारी क्वालीफिकेशन की राह बेहद कठिन थी। आज हमारा सपना साकार हो गया है कि हम स्पेन जैसी टीम के खिलाफ खेल पाए। मैं इस प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों पर गर्व करता हूं। हम जीवन में ऐसे ही पलों के लिए मेहनत करते हैं। मैं अब 40 वर्ष का हूं, लेकिन 25 वर्ष की उम्र तक पेशेवर खिलाड़ी नहीं था। यह पूरी यात्रा का इनाम है।”


अपने युवा स्वरूप को सलाह


ग्रुप सी में अब केप वर्दे का सामना उरुग्वे और सऊदी अरब से होना बाकी है, और टीम को नॉकआउट चरण में पहुंचने की वास्तविक उम्मीद है। वोज़िन्हा के लिए एक देर से प्रोफेशनल बनने से लेकर विश्व कप प्रतीक बनने तक की यात्रा अब भी अविश्वसनीय लगती है। मोल्दोवा, स्लोवाकिया और साइप्रस में खेल चुके इस गोलकीपर ने अपने करियर मार्ग पर विचार करते हुए कहा, “मैं 18 वर्षीय वोज़िन्हा से कहूंगा कि वह खुद पर गर्व करे। उसने बहुत मेहनत की। सच कहूं तो मैंने कभी ऐसे सपने नहीं देखे थे, लेकिन अब इस मैच के बाद मैं अपने युवा स्वरूप से कह सकता हूं कि यह सब वाकई सार्थक था।”


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