भारत के सबसे बड़े और लंबे समय से इंतजार किए जा रहे IPO में से एक, NSE की लिस्टिंग अब हकीकत के करीब पहुंच गई है. NSE द्वारा DRHP दाखिल करने के बाद निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या अभी BSE के शेयरों में निवेश करना बेहतर होगा या फिर NSE के IPO का इंतजार करना चाहिए. बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSE की लिस्टिंग से जुड़ी ज्यादातर उम्मीदें पहले ही BSE के शेयर में शामिल हो चुकी हैं. ऐसे में आगे का रास्ता कंपनी के असली प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.
करीब एक दशक के इंतजार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपना DRHP दाखिल कर दिया है. इससे भारत के सबसे चर्चित IPO का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. हालांकि बाजार एक्सपर्ट्स इसे कोई नया ट्रिगर नहीं, बल्कि पहले से मौजूद उम्मीदों की पुष्टि मान रहे हैं. ईटी की रिपोर्ट में मंगल केशव फाइनेंशियल के चेयरमैन परेश भगत का कहना है कि NSE की लिस्टिंग को लेकर बाजार पहले से ही पॉजिटिव था. DRHP फाइल होने से सिर्फ यह साफ हो गया है कि लिस्टिंग की प्रोसेस आगे बढ़ रही है. इससे BSE के मुख्य कारोबार या उसकी कमाई की क्षमता में कोई बदलाव नहीं आता.
BSE के बिजनेस मॉडल पर नहीं पड़ेगा सीधा असरएक्सपर्ट्स के मुताबिक NSE का IPO पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) आधारित है. इसका मतलब है कि कंपनी के पास नया पैसा नहीं आएगा, बल्कि मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचेंगे. दिलचस्प बात यह है कि NSE के शेयर भी BSE पर ही लिस्ट होंगे. परेश भगत का कहना है कि इससे सिर्फ निवेशकों को दोनों एक्सचेंजों के बीच सीधी तुलना करने का मौका मिलेगा. अभी तक NSE का वैल्यूएशन केवल अनुमान के आधार पर किया जाता था, लेकिन लिस्टिंग के बाद दोनों कंपनियों के वैल्यूएशन, ग्रोथ और मुनाफे की तुलना संभव होगी.
BSE में पहले ही दिख चुका है NSE की लिस्टिंग का असरपिछले एक साल में BSE के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. विश्लेषकों का मानना है कि इस तेजी की एक बड़ी वजह NSE की संभावित लिस्टिंग भी रही है. रघुनाथ कैपिटल के एमडी सौरव चौधरी के अनुसार, BSE के शेयर में NSE IPO से मिलने वाले ज्यादातर फायदे पहले ही शामिल हो चुके हैं. निवेशकों ने BSE को उसकी मजबूत कमाई, डेरिवेटिव कारोबार में बढ़ती हिस्सेदारी और NSE लिस्टिंग की उम्मीदों के आधार पर बेहतर वैल्यूएशन दिया है. उनका मानना है कि अब BSE के शेयर की दिशा किसी खास घटना से नहीं, बल्कि कंपनी की कमाई और बिजनेस प्रदर्शन से तय होगी.
निवेशकों को क्या करना चाहिए?आशिका कैपिटल के सीनियर एसोसिएट ईशान तन्ना का कहना है कि निवेश का फैसला सिर्फ NSE IPO का इंतजार करने या न करने पर आधारित नहीं होना चाहिए. BSE भारत के तेजी से बढ़ते कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम का हिस्सा है और इसे बढ़ती रिटेल भागीदारी, म्यूचुअल फंड निवेश और बाजार गतिविधियों का फायदा मिल रहा है.
हालांकि NSE के लिस्ट होने के बाद दोनों एक्सचेंजों की तुलना और ज्यादा गहराई से होगी. ऐसे में BSE के लिए अपने वैल्यूएशन को सही साबित करने के लिए मजबूत प्रदर्शन जारी रखना जरूरी होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर BSE अपने डेरिवेटिव कारोबार का विस्तार करता है और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी बनाए रखता है, तो निवेशकों के लिए आगे भी पैसा बनने की संभावना बनी रहेगी. वहीं सिर्फ NSE IPO का इंतजार करने से निवेशक सेक्टर के मौजूदा मौकों से चूक सकते हैं.
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