मध्य प्रदेश: 'क्या यह बच्ची लाडली नहीं…' दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्ची के लिए कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
TV9 Bharatvarsh June 19, 2026 04:43 PM

Madhya Pradesh High Court: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में साढ़े तीन साल की मासूम अनिका शर्मा के इलाज को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या यह बच्ची भी प्रदेश की लाडली नहीं है? अदालत ने सरकार को बच्ची के इलाज के लिए अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

अनिका शर्मा एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित है. इस बीमारी के इलाज के लिए एक विशेष इंजेक्शन की आवश्यकता है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है. बच्ची के माता-पिता आर्थिक रूप से कमजोर हैं और इतने बड़े खर्च का वहन करना उनके लिए संभव नहीं है. यही वजह है कि पिछले कई महीनों से परिवार विभिन्न माध्यमों से फंड जुटाने की कोशिश कर रहा है.

आठ महीने से पैसे जुटा रहे हैं

मामले में अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अनिका के परिजन पिछले करीब आठ महीने से इलाज के लिए धन जुटाने में लगे हुए हैं. अब तक वे लगभग क्राउड फंडिंग के जरिए 7 से 8 करोड़ रुपये की राशि एकत्र कर चुके हैं, लेकिन इलाज के लिए अभी भी करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये की आवश्यकता है.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि बच्ची का इलाज दिल्ली स्थित एम्स में होना है. इलाज के लिए जरूरी इंजेक्शन लगाने से पहले अनिका का वजन 13 किलोग्राम से कम होना चाहिए. इसी वजह से परिवार पिछले कई दिनों से उसे केवल तरल आहार दे रहा है, ताकि उसका वजन नियंत्रित रखा जा सके और इलाज में कोई बाधा न आए.

अदालत ने सरकार को दिया निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय से बच्ची के इलाज के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का रास्ता तलाशें. कोर्ट ने इस मामले में एम्स दिल्ली को भी पक्षकार बनाया है. हालांकि सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से कोई प्रतिनिधि या अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ.

वकीलों ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि मध्य प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है. ऐसे में यदि सरकार विशेष प्रावधान करे तो अनिका के इलाज के लिए आवश्यक शेष राशि उपलब्ध कराई जा सकती है. इस पर अदालत ने सरकारी पक्ष से सवाल किया कि क्या यह बच्ची भी सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?

हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार को शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारें अनिका के इलाज के लिए क्या कदम उठाती हैं और इस मासूम को जीवन बचाने वाली मदद कब तक मिल पाती है.

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