Kukurdev Temple Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ का वो मंदिर, जहां शिव जी के साथ कुत्ते को पूजते हैं भक्त, जानें इसकी अनोखी कहानी
TV9 Bharatvarsh June 22, 2026 06:44 PM

Kukurdev Temple Chhattisgarh: भारत में भगवान शिव के कई प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर हैं, जहां भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना करते हैं और भगवान से जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं. ऐसा ही रहस्यमयी और अनोखा शिव मंदिर छत्तीसगढ़ में भी है. ये मंदिर प्रदेश के दुर्ग जिले के खपरी गांव में स्थित है. इस मंदिर एक सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यहां भगवान शिव के साथ भक्त एक कूत्ते को पूजते हैं.

यही कारण है कि इस मंदिर को लोग कुकुरदेव मंदिर कहते हैं. आमतौर पर मंदिरों में भगवान की प्रतिमाएं होती हैं, लेकिन इस मंदिर के गर्भगृह में एक कुत्ते की प्रतिमा लगाई गई है. इस प्रतिमा के ठीक बगल में एक प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास और इसकी मान्यताएं सदियों पुरानी हैं. आइए इस अनोखे मंदिर की कहानी जानते हैं.

मंदिर के निर्माण की कहानी

इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक बड़ी ही भावुक कहानी बताई जाती है. इसको एक वफदार जानवर की याद में बनाया गया था. पुरानी लोक कथाओं के अनुसार, सदियों पहले एक बंजारा अपने परिवार और एक पालतू कुत्ते को लेकर इस गांव में रहने के लिए आया था. बंजारा अपने कुत्ते से बहुत प्यार करता था. कुत्ता भी बहुत वफादार था. कुछ समय बाद पूरा इलाका भयंकर अकाल की चपेट में आ गया.

बंजारा दाने दाने को तरसने लगा. फिर मजबूरी में उसने गांव के एक बड़े साहूकार से कुछ पैसे लिए. समय बीतता गया. बंजारा साहूकार के पैसे चुका नहीं पाया. साहूकार अपने पैसे वापस वापस मांग रहा था. जब बंजारे को कोई रास्ता न मिला तो उसने अपने सबसे प्यारे और वफादार कुत्ते को साहूकार के पास गिरवी रख दिया. कुत्ता साहूकार के घर पर रहने लगा.

साहूकार को मिला पूरा धन वापस

एक रात साहूकार के घर पर चोरी हो गई. चोरों ने चोरी का धन और सारा किमती सामान गांव के पास ही जमीन के नीचे छिपा दिया. इधर साहूकार जब सुबह उठा तो बहुत परेशान हो गया. तब कुत्ते ने साहूकार की धोती पकड़ी और उसे वहां ले गया, जहांं चोरों ने चोरी का सामान छिपाया था. वहां खुदाई करने पर साहूकार को अपना पूरा धन वापस मिल गया.

कुत्ते की वफादारी देख साहूकार खुश हो गया और उसे आजाद कर दिया. इसी घटना की याद में गांव वालों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया. यह मंदिर लगभग 200 मीटर के बड़े दायरे में है. इसकी बनावट भी दिलचस्प है. मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दोनों ओर कुत्तों की प्रतिमाएं लगी हैं. सावन के पवित्र महीने में यहां बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं. साथ ही कुत्ते यानी कुकुरदेव की भी पूजा करते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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