बजट सत्र समाप्त होने के बाद न्यू टाउन के एक होटल में बागी विधायकों की बैठक हुई। इसमें 60 विधायक और कोलकाता के लगभग 70 पूर्व पार्षद शामिल हुए। बैठक में 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन की घोषणा की गई।
बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि विधायकों फिरहाद हकीम, रथिन घोष, सबीना यास्मीन को पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। सवाल असली या नकली होने का नहीं है, हम तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही के बारे में निर्वाचन आयोग को सूचित करेंगे। अगर ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहती हैं, तो उनका स्वागत है।
उन्होंने कहा कि हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा। नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा।
बागी नेताओं ने तृणमूल के संविधान की धारा-20 का हवाला देते हुए कहा कि हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन 2022 के बाद ऐसी कोई बैठक नहीं हुई। इसी आधार पर पुरानी कार्यसमिति को भंग कर नई समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। इसके बाद 28 में से 20 लोकसभा सदस्य भी तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया। इन सांसदों ने भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की भी घोषणा की।
edited by : Nrapendra Gupta