Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर ये एक गलती बिगाड़ सकती है सारा पुण्य, जानिए क्या न करें
TV9 Bharatvarsh June 23, 2026 01:43 PM

Ekadashi Fasting Rules: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. साल भर में कुल 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन इन सबमें ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सबसे कठिन माना गया है. इसे हम निर्जला एकादशी के नाम से जानते हैं. जैसा कि नाम से ही पता चलता है निर्जला यानी बिना जल के. इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करना होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, यदि आप साल भर की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत रख लेने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिल जाता है. लेकिन इस महापर्व पर एक ऐसी गलती है, जिसे करने से आपका सारा पुण्य नष्ट हो सकता है. आइए जानते हैं उस बड़ी भूल और इस दिन क्या करने से बचना चाहिए.

निर्जला एकादशी के दिन भूलकर भी न करें यह गलतियां!

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन करना या अन्न ग्रहण करना व्रत के नियमों के खिलाफ माना जाता है. लेकिन सबसे बड़ी गलती यह मानी जाती है कि व्रत रखने के बावजूद व्यक्ति क्रोध, गलत आचरण या झूठ या किसी का अपमान करे. शास्त्रों में कहा गया है कि केवल भोजन का त्याग ही व्रत नहीं होता, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता भी उतनी ही जरूरी है. यदि कोई व्यक्ति दिनभर व्रत रखे, लेकिन दूसरों के प्रति बुरा व्यवहार करे, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता. इसलिए निर्जला एकादशी के दिन विशेष रूप से क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

निर्जला एकादशी पर किन बातों का रखें ध्यान?

निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. पीले फूल, तुलसी दल और भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. दिनभर भगवान के नाम का स्मरण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और धार्मिक कामों में समय बिताना लाभकारी माना जाता है.इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को जल, छाता, वस्त्र, फल या किसी दूसरी उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है.

व्रत के दौरान क्यों जरूरी है संयम?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार व्रत का उद्देश्य केवल उपवास करना नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आत्मशुद्धि भी है. इसलिए निर्जला एकादशी पर व्यक्ति को अपने व्यवहार, विचार और वाणी पर खास तौर पर ध्यान देना चाहिए. इस दिन जितना अधिक मन भगवान की भक्ति में लगेगा, उतना ही अधिक शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है.

क्या है निर्जला एकादशी का महत्व?

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी थी. मान्यता है कि इस एक दिन के कठिन व्रत से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है. इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा पूरे दिन उपवास रखकर भक्ति में समय बिताते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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