अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की
Indias News Hindi June 23, 2026 11:42 PM

श्रीनगर, 23 जून . जम्मू-कश्मीर Government ने आगामी श्री अमरनाथ यात्रा के सुचारू और समन्वित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए Tuesday को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है.

केंद्र शासित प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी 22 जून के सरकारी आदेश के अनुसार, ये नियुक्तियां अधिकारियों की मौजूदा जिम्मेदारियों के अतिरिक्त की गई हैं.

सरकारी आदेश के अनुसार, जम्मू-कश्मीर Government और युवा सेवा एवं खेल विभाग के आयुक्त/सचिव शाहिद इकबाल चौधरी को वार्षिक तीर्थयात्रा के प्रमुख मार्गों में से एक पहलगाम मार्ग के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है.

इसी प्रकार, जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास निगम (जेकेपीडीसी) के प्रबंध निदेशक और जम्मू-कश्मीर विद्युत निगम लिमिटेड (जेकेपीसीएल) के अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राहुल यादव को बाल्टल मार्ग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है.

सरकारी आदेश में कहा गया है कि दोनों अधिकारी अमरनाथ यात्रा से संबंधित सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से निगरानी करेंगे और तीर्थयात्रा के संचालन में शामिल संबंधित विभागों और एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखेंगे.

उन्हें श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदीप के. भंडारी से नियमित रूप से संपर्क करने और उन्हें रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया गया है.

इन नियुक्तियों का उद्देश्य अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना और लाखों श्रद्धालुओं के लिए रसद, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं, सुरक्षा उपायों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का सुचारू प्रबंधन सुनिश्चित करना है.

यह सरकारी आदेश जम्मू और कश्मीर Government के सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त/सचिव एम. राजू द्वारा उपGovernor मनोज सिन्हा के आदेश पर जारी किया गया था.

आगामी अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को 57 दिनों के बाद समाप्त होगी.

यात्री अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम बेस कैंप मार्ग या गांदरबल जिले में स्थित बालटाल बेस कैंप मार्ग का उपयोग करके गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं.

पहलगाम मार्ग से जाने वाले यात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से जाने वाले यात्री गुफा मंदिर के दर्शन करने के बाद उसी दिन बेस कैंप लौट आते हैं.

कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 38,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा मंदिर में बर्फ की एक ऐसी संरचना है जो चंद्रमा की कलाओं के साथ घटती-बढ़ती रहती है.

भक्तों का मानना ​​है कि बर्फ की यह संरचना भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है.

एमएस/

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