Nirjala Ekadashi Vrat Breaks Remedies: अगर अनजाने में टूट जाए निर्जला एकादशी का व्रत तो क्या करें श्रद्धालु?
TV9 Bharatvarsh June 24, 2026 10:42 AM

Nirjala Ekadashi 2026: इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा. इस व्रत को सभी चौबीस एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि जो श्रद्धालु सालभर एकादशी का व्रत नहीं कर सकता है और वो अगर इस व्रत को धारण करता है तो उसे भगवान विष्णु पूरा फल देते हैं. वहीं, अगर अनजाने में निर्जला एकादशी का व्रत टूट जाए तो श्रद्धालुओं के मन में एक सवाल उठता है कि कहीं बड़ी परेशानी तो नहीं खड़ी हो जाएगी. आइए जानते हैं कि अगर व्रत टूटता है तो उसके क्या उपाय हैं?

द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस बार एकादशी तिथि 24 जून की शाम 06 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है और जून 25 जून को शाम 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगी इसलिए 25 जून की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना बेहद उचित रहेगा. ये निर्जला एकादशी का व्रत किसी भी प्रकार के भोजन और पानी के बिना किया जाता है.

निर्जला एकादशी का व्रत टूटने पर क्या करें?

शास्त्रों के साथ-साथ साधु संत बताते आए हैं कि भगवान हमेशा भाव के भूखे हैं. यदि किसी व्रती ने अनजाने में एकादशी के व्रत के समय पानी पी लिया या फिर कुछ खा लिया तो इसे जानबूझकर की गई गलती के समान नहीं माना जाता है. अगर व्रत टूट जाता है तो सबसे पहले भगवान विष्णु से क्षमा मांगनी चाहिए.

  • श्रद्धालु भगवान विष्णु से प्रार्थना करें कि हे प्रभु मुझसे भूलवश ये गलती हुई है, जिसे स्वीकार करें.
  • व्रत टूटने के बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें.
  • विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें.
  • अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें.
  • दिनभर सात्विक आचरण रखें.
  • व्रत की भावना को बरकरार रखें.
  • किसी से झूठ और कठोर न बोलें.
निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा

द्रिक पंचांग के मुताबिक, इसे पांडव एकादशी और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. पांडवों में दूसरा भाई भीमसेन खाने-पीने का अत्यधिक शौकीन था और अपनी भूख को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं था इसी कारण वह एकादशी व्रत को नहीं कर पाता था. भीम के अलावा बाकि पांडव भाई और द्रौपदी साल की सभी एकादशी व्रतों को पूरी श्रद्धा भक्ति से किया करते थे. भीमसेन अपनी इस लाचारी और कमजोरी को लेकर परेशान था. भीमसेन को लगता था कि वह एकादशी व्रत न करके भगवान विष्णु का अनादर कर रहा है. इस दुविधा से उभरने के लिए भीमसेन महर्षि व्यास के पास गया तब महर्षि व्यास ने भीमसेन को साल में एक बार निर्जला एकादशी व्रत को करने कि सलाह दी और कहा कि निर्जला एकादशी साल की चौबीस एकादशियों के तुल्य है. इसी पौराणिक कथा के बाद निर्जला एकादशी भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हो गई.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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