भारतीय निवेशकों के लिए अब सिर्फ अमेरिकी शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि जापान, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई देशों के शेयर बाजारों में भी निवेश करना संभव है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशों में निवेश की अनुमति तो है, लेकिन हर बाजार तक पहुंचना उतना आसान नहीं है.आइए जानते हैं कि इस बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है.
जापान, साउथ कोरिया और ताइवान के शेयरों में निवेशInCred Money के CEO विजय कुप्पा के अनुसार, भारतीय निवेशक LRS के तहत इन देशों के शेयरों, बॉन्ड्स और फंड्स में सीधे निवेश कर सकते हैं.वहीं Anand Rathi International Ventures IFSC के निदेशक और CEO नितीन डोंगरे बताते हैं कि LRS योजना के तहत भारतीय निवासी हर वित्त वर्ष में 2.5 लाख डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये) तक विदेश भेज सकते हैं. इस रकम का इस्तेमाल वैश्विक बाजारों में निवेश के लिए भी किया जा सकता है.
क्या तीनों बाजारों में निवेश करना समान रूप से आसान है?ऐसा नहीं है. Sahi के रिसर्च प्रमुख गौरव अरोड़ा के मुताबिक, हर बाजार की अपनी चुनौतियां हैं.जापान के बाजार में निवेश करना अपेक्षाकृत आसान है क्योंकि कई वैश्विक ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म इसकी सुविधा देते हैं. लेकिन साउथ कोरिया में सीधे निवेश करना थोड़ा जटिल है, क्योंकि कई अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म भारतीय खातों को वहां ट्रेडिंग की अनुमति नहीं देते.
ताइवान में स्थिति और कठिन है. वहां विदेशी निवेशकों को स्थानीय रजिस्ट्रेशन और टैक्स आईडी की जरूरत होती है. यही वजह है कि आम निवेशकों के लिए ताइवान के शेयरों में सीधे निवेश करना काफी मुश्किल माना जाता है.
भारतीय निवेशकों के लिए कौन-कौन से विकल्प हैं?विशेषज्ञों के अनुसार निवेश के चार प्रमुख रास्ते हैं:
1. इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड और फंड ऑफ फंड्स (FoFs)
यह सबसे आसान तरीका माना जाता है. हालांकि विदेशी निवेश की सीमा पूरी होने के कारण कई AMC ने नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा रखी है.
2. इंटरनेशनल ETF
अमेरिका में सूचीबद्ध देश-विशेष ETF के जरिए जापान, साउथ कोरिया और ताइवान के बाजारों में निवेश किया जा सकता है.
3. इंटरनेशनल ब्रोकरेज अकाउंट
अमेरिकी ब्रोकरेज अकाउंट खोलकर दुनिया के कई बाजारों में निवेश किया जा सकता है. यह विकल्प निवेशकों को ज्यादा लचीलापन देता है.
4. GIFT City प्लेटफॉर्म
GIFT City के IFSC प्लेटफॉर्म के जरिए भी वैश्विक बाजारों में निवेश के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं.
विदेशी बाजारों में निवेश करते समय सिर्फ शेयर की चाल ही नहीं, बल्कि मुद्रा विनिमय दरों का भी असर पड़ता है. जापानी येन, कोरियन वॉन या ताइवानी डॉलर में होने वाले उतार-चढ़ाव आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं.
इसके अलावा ये बाजार तकनीक और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा निर्भर हैं, इसलिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का इन पर बड़ा असर पड़ता है.
टैक्स नियमों को भी समझेंविशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी शेयरों को 24 महीने से ज्यादा रखने पर होने वाले लाभ पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है. वहीं 24 महीने से कम अवधि में बेचे गए निवेश पर आपकी आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है.
इसके अलावा विदेशी संपत्तियों की जानकारी आयकर रिटर्न में Schedule FA के तहत देना भी जरूरी है. LRS के जरिए 10 लाख रुपये से अधिक रकम विदेश भेजने पर TCS (Tax Collected at Source) भी लागू हो सकता है.
कुल मिलाकर, भारतीय निवेशकों के लिए जापान, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में निवेश के अवसर मौजूद हैं, लेकिन निवेश से पहले नियमों, जोखिमों और टैक्स संबंधी पहलुओं को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है.