भारत अब अपने मशहूर आमों को दुनिया के नए और प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है. पारंपरिक खरीदार देशों में मांग कमजोर पड़ने के बाद सरकार और निर्यात एजेंसियां ऐसे देशों पर फोकस कर रही हैं, जहां बेहतर गुणवत्ता वाले फलों के लिए ग्राहक ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं. इसी कड़ी में इस सप्ताह पहली बार आइसलैंड में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए.
आइसलैंड में पहली बार हुआ भारतीय आम का प्रचाररेकजाविक स्थित भारतीय दूतावास ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से 24 और 25 जून को रेकजाविक और अकुरेयरी में भारतीय आमों का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया. इस दौरान भारत की लोकप्रिय किस्में दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर स्थानीय आयातकों, कारोबारियों और उपभोक्ताओं के सामने पेश की गईं. इस पहल का उद्देश्य भारतीय आमों की गुणवत्ता से नए बाजारों को परिचित कराना और वहां निर्यात के अवसर बढ़ाना है.
बड़े खरीदार देशों में घटी भारतीय आम की मांगहालिया व्यापार आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत के कई प्रमुख आम आयातक देशों में निर्यात घटा है. भारत के सबसे बड़े बाजार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को आम का निर्यात पिछले साल के 96.5 लाख डॉलर से घटकर 36.4 लाख डॉलर रह गया.
इसी तरह, अमेरिका को निर्यात 50.8 लाख डॉलर से घटकर 35 लाख डॉलर और ब्रिटेन को 35.2 लाख डॉलर से घटकर 23.5 लाख डॉलर रह गया. इसके अलावा सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों में भी भारतीय आम की मांग में कमी दर्ज की गई. इन आंकड़ों से साफ है कि भारत को अब पारंपरिक बाजारों के अलावा नए देशों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी.
प्रीमियम बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतहालांकि सभी देशों में स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ विकसित देशों में भारतीय आमों की मांग बढ़ी है. ओमान को निर्यात बढ़कर 9.4 लाख डॉलर, जर्मनी को 7.4 लाख डॉलर, न्यूजीलैंड को 3.5 लाख डॉलर और जापान को निर्यात दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1.7 लाख डॉलर पहुंच गया. यह संकेत देता है कि उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय आमों के लिए प्रीमियम बाजारों में अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं.
आइसलैंड बन सकता है नया अवसरAPEDA के अनुसार, 2025 में आइसलैंड ने करीब 33 लाख डॉलर के आम आयात किए थे. फिलहाल वहां थाईलैंड, ब्राजील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आम मंगाए जाते हैं. भारत अब इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
हाल ही में हुए भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) से भी भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर आम, के लिए बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है. आइसलैंड के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा मिल सकता है.
निर्यातकों को मिल सकती है बेहतर कीमतविशेषज्ञों का मानना है कि भारत का लक्ष्य केवल आम का निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे समृद्ध बाजारों में पहुंच बनाना है जहां ग्राहक प्रीमियम गुणवत्ता वाले फलों के लिए अधिक कीमत देने को तैयार हों. अगर यह रणनीति सफल रहती है, तो भारतीय आम निर्यातकों को नए बाजार मिलने के साथ बेहतर दाम भी मिलेंगे और खाड़ी देशों जैसे पारंपरिक बाजारों पर उनकी निर्भरता कम होगी. इससे भारतीय आम की वैश्विक पहचान और निर्यात दोनों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.