इश्माएल सैबारी ने नाटकीय पेनल्टी शूटआउट में अपना संयम बनाए रखा और मोरक्को को अंतिम-16 में पहुंचाते हुए नीदरलैंड्स को हाल के इतिहास में उनके सबसे शुरुआती फीफा विश्व कप से बाहर होने पर मजबूर कर दिया। सोमवार रात मोंटेरे में हुए मुकाबले में ‘एटलस लायंस’ ने 1-1 की बराबरी के बाद 3-2 से शूटआउट में जीत दर्ज की।
चार राउंड के बाद जब शूटआउट 2-2 से बराबरी पर था, तब मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने निर्णायक पल रचा। उन्होंने बाईं ओर डाइव लगाकर क्राइसेन्सियो समरविल के शॉट को रोक लिया। इस बचाव ने मैच का रुख मोरक्को की ओर मोड़ दिया। इसके बाद सैबारी ने निर्णायक पेनल्टी ली और शांतचित्त होकर बाएं निचले कोने में गेंद भेज दी, जबकि बार्ट वेरब्रुगन विपरीत दिशा में कूद गए।
नीदरलैंड्स 72वें मिनट में कोडी गक्पो के गोल की बदौलत आगे निकलने की राह पर दिख रहा था। गक्पो ने समरविल की सटीक सहायता पर गोल दागा। उस गोल के बाद डच बेंच मैदान पर दौड़ पड़ी और गक्पो भावनाओं में बह गए, क्योंकि उन्होंने हाल ही में अपने अजन्मे बच्चे के निधन का खुलासा किया था।
हालांकि, मोरक्को ने हार मानने से इंकार कर दिया। इंजरी टाइम के गहराई में 91वें मिनट में ईसा दियाॅप ने केम्सदीन तालबी के क्रॉस पर शानदार हेडर लगाकर गोल कर दिया और मुकाबले को एस्टादियो बीबीवीए में अतिरिक्त समय में पहुंचा दिया।
अतिरिक्त 30 मिनट में दोनों टीमों में से कोई भी साफ मौक़ा नहीं बना सकी, जिससे यह मुकाबला शूटआउट तक पहुंच गया। यह राउंड की दो सबसे ऊंची रैंकिंग वाली टीमों के बीच का टकराव था — मोरक्को विश्व में छठे स्थान पर और नीदरलैंड्स सातवें पर।
इस परिणाम के साथ नीदरलैंड्स की वह श्रृंखला समाप्त हो गई जिसमें वे पिछले आठ विश्व कपों में कम से कम राउंड ऑफ 16 तक पहुंचे थे, जिसमें चार साल पहले का क्वार्टरफाइनल भी शामिल है। वहीं, पिछली बार सेमीफाइनल तक पहुंची मोरक्को की टीम ने विश्व स्तर पर अपनी शानदार प्रगति जारी रखी है।
यह टूर्नामेंट का दूसरा पेनल्टी शूटआउट भी था, इससे पहले दिन पराग्वे ने जर्मनी को शूटआउट में हराया था।