मराठी थिएटर जगत को बड़ा झटका, दिग्गज डायरेक्टर विजया मेहता का निधन, 'बाई' के नाम से थीं मशहूर
TV9 Bharatvarsh July 01, 2026 03:43 AM

Director Vijaya Mehta Passed Away: मराठी रंगमंच (थिएटर) और सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है. पैरेलल और एक्सपेरिमेंटल मराठी थिएटर को एक नई पहचान दिलाने वाली दिग्गज एक्ट्रेस, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विजया मेहता का निधन हो गया है. वो 92 साल की थीं. उन्होंने मुंबई में अपने घर पर आखिरी सांस ली. उनके जाने से पूरे कला जगत में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. नाट्य जगत के लोग उन्हें प्यार और सम्मान से ‘बाई’ (टीचर) कहकर बुलाते थे.

विजया मेहता ने 1960 के दशक में मराठी रंगमंच पर जो प्रयोग किए, उसने पूरे देश के थिएटर जगत को प्रभावित किया. उन्होंने कमर्शियल नाटकों से हटकर समांतर (पैरेलल) और प्रायोगिक रंगमंच की एक ऐसी मजबूत लहर शुरू की, जिसने कई नए कलाकारों को रास्ता दिखाया.

गुजरात में हुआ था जन्म, दिग्गजों से सीखी थी एक्टिंग

विजया मेहता का जन्म 4 नवंबर 1934 को गुजरात के बड़ोदरा में हुआ था. मुंबई यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कला की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने दिल्ली में मशहूर रंगकर्मी इब्राहिम अल्काजी और मुंबई में आदि मर्जाबान जैसे उस्तादों से एक्टिंग और नाट्यशास्त्र की बारीकियां सीखी थीं. यही वजह थी कि उनका काम हमेशा सबसे अलग और बेहद गहरा होता था.

‘रंगायन’ संस्था से बदला मराठी थिएटर का चेहरा

60 के दशक में विजया मेहता ने महान नाटककार विजय तेंदुलकर, दिग्गज अभिनेता डॉ. श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे के साथ मिलकर ‘रंगायन’ नाम की एक नाट्य संस्था बनाई थी. इस संस्था ने मराठी नाटकों को पुराने ढर्रे से बाहर निकाला और समाज के कड़वे सच को मंच पर उतारना शुरू किया.

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उनके निर्देशन में बने कई नाटक भारतीय रंगमंच के इतिहास में मील का पत्थर माने जाते हैं. इनमें ‘एक शून्य बाजीराव’ सबसे प्रमुख है. इसके अलावा, जर्मन नाटककार बर्टोल्ट ब्रेख्त के नाटक का मराठी रूपांतरण ‘अजब न्याय वर्तुलाचा’ भी सुपरहिट रहा. उन्होंने ‘बॅरिस्टर’, ‘शाकुंतल’, ‘हमीदाबाईची कोठी’ आणि ‘मदर’ जैसे कई यादगार नाटकों का निर्देशन किया, जो आज भी नए कलाकारों के लिए एक सीख की तरह हैं. विजया मेहता का जाना रंगमंच के एक सुनहरे युग का अंत है. थियेटर और फिल्मों में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

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