34 साल पहले मुक्त कराए गए 300 बंधुआ मजदूरों को योजनाओं का लाभ देने का हाईकोर्ट का निर्देश
Indias News Hindi July 02, 2026 05:43 PM

रांची, 2 जुलाई . Jharkhand हाईकोर्ट ने लगभग 34 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से मुक्त कराए गए Jharkhand निवासी करीब 300 बंधुआ मजदूरों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

अदालत ने कहा कि बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोगों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और इसके लिए गढ़वा के उपायुक्त जरूरी कदम उठाएं. मुख्य न्यायाधीश एसएम सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह निर्देश जनहित सेवा प्रतिष्ठान के घनश्याम पाठक की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.

याचिका में बताया गया है कि वर्ष 1992 में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब 300 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया था. इनमें से कई लोग अब गढ़वा जिले में रह रहे हैं. बावजूद इसके, उन्हें बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत मिलने वाली पुनर्वास सुविधाओं और आवास, स्वास्थ्य, रोजगार, पेंशन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है.

यह जनहित याचिका वर्ष 2023 में दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने कई बार संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पिछले तीन वर्षों में अधिकारियों ने केवल पत्राचार किया, लेकिन मजदूरों को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना था कि मामले को आगे बढ़ाने के बजाय सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती रहीं.

इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पात्र लोगों को उनका अधिकार मिलने में इतनी देरी उचित नहीं है. अदालत ने गढ़वा के उपायुक्त से कहा कि सभी पात्र मजदूरों की पहचान कर उन्हें बंधुआ मजदूर अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ और अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए.

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा. जरूरत इस बात की है कि जिन लोगों को कानून के तहत सहायता मिलनी चाहिए, उन्हें उसका वास्तविक लाभ भी मिले.

एसएनसी/डीकेपी

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