UGC NET 2026 पर उठे सवाल, इंग्लिश में 2024 एग्जाम के सवाल काॅपी-पेस्ट होने का दावा! AI से तैयार हुआ सोशियोलॉजीका पेपर
TV9 Bharatvarsh July 02, 2026 05:43 PM

UGC NET 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बीते दिनों यूजीसी नेट 2026 का आयोजन किया था, जिसके तहत 87 विषयों में सफलतापूर्वक यूजीसी नेट 2026 आयोजित की गई, लेकिन यूजीसी नेट के कुछ विषयाें के पेपरों को लेकर नया बवाल शुरू होता हुआ दिख रहा है. मसलन, यूजीसी नेट 2026 इंग्लिश और सोशियोलॉजी के पेपर में पूछे गए सवालाें को कैंडिडेट्स मुखर हैं और अपनी-अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कई कैंडिडेट्स ये दावा कर रहे हैं कि यूजीसी नेट 2026 इंग्लिश के पेपर में पूछे गए सवाल 2024 यूजी नेट के पेपर से कॉपी पेस्ट किए गए हैं. वहीं कई कैंडिडेट्स का कहना है कि यूजीसी नेट 2026 सोशियोलॉजी के पेपर में पूछे गए सवाल आउट ऑफ द सिलेबस हैं. इसको लेकर नया बवाल शुरू हो गया है. यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा 22 जून से 30 जून तक दो शिफ्ट में आयोजित की गई थी. पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक हुई थी.

आइए, पूरा मामला विस्तार से समझते हैं. जानते हैं कि यूजीसी नेट 2026 इंग्लिश औ सोशियोलॉजी पेपर में पूछे गए सवालों को लेकर क्यों बवाल शुरू हो गया है. मसलन, जानेंगे कि कैंडिडेट्स क्यों नाराज हैं.

इंग्लिश के 67 सवाल कॉपी-पेस्ट

यूजीसी नेट 2026 इंग्लिश के पेपर में सवाल कॉपी-पेस्ट होने का दावा कैंडिडेट्स की तरफ से किया जा रहा है. कैंडिडेट्स ने दावा किया है कि यूजीसी नेट 2026 इंग्लिश के पेपर में कुल 150 पूछे गए थे. इसमें से 67 सवाल ऐसे हैं, जो यूजीसी नेट 2024 इंग्लिश के पेपर में पूछे गए थे. यानी कि 2024 में पूछे गए सवालों को कॉपी पेस्ट कर 2026 का पेपर बनाया गया.

सोशियोलॉजी में पूछे गए आउट ऑफ सिलेबस सवाल

वहीं कैंडिडेट्स की तरफ से यूजीसी नेट 2026 सोशोलॉजी के पेपर को लेकर भी सवाल किया जा रहा है. कैंडिडेट्स ने दावा किया है यूजीसी नेट 2026 सोशियोलॉजी पेपर में पूछे गए कई सवाल AI से तैयार किए गए हैं, जो सिलेबस से बाहर से हैं. मसलन, ऐसे विचारकों व किताबों से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका सिलेबस से कोई संबंध नहीं है.

इसके अलावा, पेपर में बड़ी संख्या में वर्तनी और व्याकरण की गलतियां होने का भी आरोप है. कैंडिडेट्स का कहना है कि कई प्रमुख समाजशास्त्रियों के नाम भी गलत लिखे गए हैं, जैसे Ritzer की जगह Putzer, Parsons की जगह Parsow, Ghurye की जगह Ghunye, A R Desai की जगह A K Desai और Nussbaum की जगह Nusbaut लिखा गया है.कैंडिडेट्स ने पेपर के हिंदी अनुवाद पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि कई सवालों का अनुवाद इतना गलत था कि सवाल समझना ही मुश्किल हो गया, जिससे सही उत्तर देना भरने में मुश्किल हुई.

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