OMG! आंख फड़कना रोकने के चक्कर में खुद को किया अंधा! इंटरनेट पर मिला टोटका पड़ा महंगा
TV9 Bharatvarsh July 03, 2026 10:43 PM

चीन के वुहान शहर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि इंसान के जीवन में अंधविश्वास कितना खतरनाक हो सकता है. मध्य चीन में ले नाम के एक आदमी की दाहिनी आंख कुछ दिनों से लगातार फड़क रही थी. अब चीन में एक पुरानी कहावत बहुत मशहूर है कि बाईं आंख फड़के तो पैसा आए, दाईं फड़के तो मुसीबत आए. बस इसी डर से ले काफी ज्यादा परेशान हो गया.

उसे लगने लगा कि दाहिनी आंख का फड़कना उसके लिए कोई बुरा संकेत है. कुछ बड़ा अनहोनी होने वाली है. उसने पहले आंखों को आराम दिया, गर्म कपड़े से सेंक भी लगाई, पर फड़कना बंद ही नहीं हुआ. डॉक्टर के पास जाने की बजाय उसने गूगल पर उपाय ढूंढने शुरू कर दिए. इंटरनेट पर उसे पढ़ने को मिला कि अगर पलकों को थपथपाओ तो बुरी किस्मत टल जाती है. चीन में कई बुजुर्ग तो ये भी मानते हैं कि पलक पर सफेद कागज की पट्टी चिपका दो तो फड़कना रुक जाता है. ले ने ये सब नहीं किया. उसने सीधा अपनी आंख के आसपास जोर-जोर से थप्पड़ मारने शुरू कर दिए. एक दिन नहीं, दो दिन नहीं पूरे तीन दिन तक वो ऐसा करता रहा.

बच गई आंखों की रोशनी

नतीजा ये हुआ कि फड़कना तो रुक गया, लेकिन उसकी आंखों की रोशनी जाने लगी. पहले साइड से दिखना बंद हुआ. उसे लगा शायद थकान है. फिर धीरे-धीरे सामने भी धुंधला दिखने लगा. जब हालत ज्यादा खराब हुई तो वो डॉक्टर के पास भागा. जांच में पता चला कि उसकी रेटिना अपनी जगह से खिसक गई है, जिसे मेडिकल भाषा में रेटिनल डिटैचमेंट कहते हैं.

डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की. किस्मत अच्छी थी कि ऑपरेशन के बाद उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई. लेकिन सोचिए, जरा सी लापरवाही और अंधविश्वास की वजह से वो हमेशा के लिए अंधा भी हो सकता था. डॉक्टरों का कहना है कि हमारी रेटिना बहुत ही नाजुक होती है. उसकी मोटाई 0.3 मिलीमीटर से भी कम है, यानी कागज से भी पतली. अगर आप आंख पर तेज थप्पड़ मारते हैं तो उसका झटका सीधा पुतली और रेटिना तक पहुंचता है. इससे रेटिना फट सकती है या अपनी जगह से हट सकती है. और एक बार रेटिना डैमेज हो गई तो रोशनी जाना तय है.

ले ने इस पूरे मामले पर अभी तक कुछ नहीं बोला है. शायद वो खुद भी शर्मिंदा होगा कि एक छोटी सी बात के लिए उसने अपनी आंख दांव पर लगा दी. डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर केस में पलकों का फड़कना कोई अपशगुन-वपशगुन नहीं होता. ये बस शरीर का सिग्नल है. जब हम बहुत देर तक मोबाइल या लैपटॉप देखते हैं, नींद पूरी नहीं होती, या टेंशन ज्यादा ले लेते हैं, तो आंखें फड़कने लगती हैं.

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आमतौर पर अच्छी नींद लेने से, स्क्रीन टाइम कम करने से और स्ट्रेस कम करने से ये अपने आप ठीक हो जाता है. हां, अगर फड़कना एक हफ्ते से ज्यादा खिंच जाए, या फिर गाल और होंठ के आसपास भी होने लगे, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. तब न्यूरोलॉजिस्ट या आई स्पेशलिस्ट को दिखाना जरूरी है. चीन में ऐसा पहले भी हो चुका है. हुनान प्रांत की एक महिला की बाईं आंख तीन साल तक फड़कती रही. पर वो डॉक्टर के पास नहीं गई क्योंकि उसे लगता था कि बाईं आंख फड़कना तो लकी होता है, पैसा आएगा. नतीजा ये हुआ कि जून तक उसकी आधी चेहरे की मसल्स खिंचने लगीं. डॉक्टरों ने बताया कि उसे हेमिफेशियल स्पाज्म हो गया था.

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