भारत सरकार देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है. सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी देने की दिशा में तेजी दिखाई है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में मोबाइल, कार और आधुनिक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली चिप्स अब भारत में ही बड़े स्तर पर तैयार होंगी. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत अपनी 75 फीसदी जरूरतें खुद पूरी करे. इस फैसले से शेयर बाजार की दो प्रमुख कंपनियों के लिए विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं.
1- केन्स टेक्नोलॉजी पर निवेशकों की नजरसेमीकंडक्टर सेक्टर में काम कर रही कंपनियों में केन्स टेक्नोलॉजी का नाम सबसे आगे है. कंपनी गुजरात में ‘ओएसएटी’ (OSAT) फैसिलिटी बना रही है, जहां चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग का काम होगा. अगर सरकार इस सेक्टर के लिए और प्रोत्साहन लाती है, तो केन्स टेक्नोलॉजी को इसका सबसे पहले फायदा मिल सकता है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के शेयर में शुक्रवार को 5.5 फीसदी की तेजी देखी गई और यह 3333 रुपये पर बंद हुआ. बीते पांच सालों में इस स्टॉक ने निवेशकों को 328 फीसदी का दमदार रिटर्न दिया है.
2- सीजी पावर की नई पारीसीजी पावर अब सिर्फ बिजली के उपकरण बनाने तक सीमित नहीं है. सरकार ने कंपनी को ओएसएटी प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी दी है, जिससे यह सेमीकंडक्टर पैकेजिंग के कारोबार में मजबूती से उतर चुकी है. हालांकि शुक्रवार को बाजार में बिकवाली के चलते इसके शेयर 6.97 फीसदी गिरकर 892 रुपये पर आ गए, लेकिन जानकारों का मानना है कि लंबे समय के लिए यह बड़ा निवेश हो सकता है. कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड भी शानदार रहा है, जिसने पांच सालों में अपने निवेशकों का पैसा 1000 फीसदी से ज्यादा बढ़ाया है.
क्यों जरूरी है ये मिशन?आज के दौर में चिप्स के बिना कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान काम नहीं कर सकता. चाहे स्मार्टफोन हो, इलेक्ट्रिक गाड़ियां हों या फिर सुरक्षा उपकरण, हर जगह इनकी जरूरत है. कोरोना के समय दुनिया ने देखा था कि चिप की कमी से कैसे ऑटोमोबाइल सेक्टर ठप हो गया था. भारत सरकार इसी निर्भरता को खत्म करना चाहती है. डिजाइनिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक का पूरा इकोसिस्टम भारत में तैयार होने से न सिर्फ नौकरियां बढ़ेंगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ी मजबूती मिलेगी.
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