'मैं बच्ची का नाना हूं'… गुहार लगाता रहा रमेश, अपहरण का शक में 2 पुलिसवालों ने पीटा; मौत
TV9 Bharatvarsh July 07, 2026 12:43 AM

Gwalior News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में नगर पालिका के एक सफाई कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बवाल मच गया. मृतक के परिजनों ने दतिया जिले के गोराघाट थाने में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों पर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है. घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने पहले अस्पताल और फिर सिटी थाने का घेराव कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की. फिलहाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच कर उचित कार्यवाही का भरोसा दिया है.

जानकारी के मुताबिक, डबरा नगर पालिका में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत 58 वर्षीय रमेश गौर निवासी मगरौरा अपने चचेरे भाई पप्पू और नातिन के साथ बाइक से टेकनपुर जा रहे थे. बताया जा रहा है कि रास्ते में सिमरिया टेकरी के पास बच्ची किसी बात को लेकर रोने लगी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची पेट्रोल सूंघने लगी तो रमेश ने उसे ऐसा करने से रोका और एक थप्पड़ मार दिया. इसके बाद बच्ची जोर-जोर से रोने लगी, जिससे आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई.

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अपहरण की शंका में पिटाई की

इसी दौरान दतिया जिले के गोराघाट थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी जितेंद्र गुर्जर और राजकुमार पलिया वहां से गुजर रहे थे. भीड़ और रोती हुई बच्ची को देखकर उन्हें अपहरण की आशंका हुई. आरोप है कि बिना पूरी जानकारी लिए दोनों पुलिसकर्मियों ने मौके पर मौजूद कुछ लोगों के साथ मिलकर रमेश की पिटाई शुरू कर दी. परिजनों का कहना है कि रमेश लगातार खुद को बच्ची का नाना बताते रहे और बेगुनाह होने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी.

पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग

कुछ देर बाद रमेश के परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें वहां से छुड़ाकर अपने साथ ले गए. परिजनों का आरोप है कि पिटाई के कारण रमेश की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. मौत की खबर मिलते ही परिवार और समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया. बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे और बाद में सिटी थाने का घेराव कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करने लगे.

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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर पुलिसकर्मी पहले पूरी सच्चाई जान लेते तो एक निर्दोष व्यक्ति की जान नहीं जाती. वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. यदि जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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