दाल-सब्जी के मुकाबले एक अंडे से कितना मिलता है प्रोटीन, बच्चों के पोषण पर कितना पड़ेगा असर?
सोनम July 08, 2026 07:42 AM

Kolkata Mid Day Meal Egg Removed: कोलकाता के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील से अंडे हटाकर उनकी जगह शाकाहारी विकल्प देने के फैसले के बाद बच्चों के पोषण को लेकर बहस तेज हो गई है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या दाल और सब्जी अंडे जितना प्रोटीन दे सकती हैं और इसका बच्चों की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं कि आखिर इसका क्या असर होगा. 

अंडे क्यों होते हैं बेहतर विकल्प?

अंडे को लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सस्ता और आसान सोर्स माना जाता है. एक सामान्य अंडे में करीब 6 से 7 ग्राम प्रोटीन होता है. इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं, इसलिए इसे कम्प्लीट प्रोटीन भी कहा जाता है. यही वजह है कि बढ़ते बच्चों के खानपान में अंडे को अहम माना जाता है. 

दाल और सब्जी का विकल्प?

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दाल प्रोटीन का अच्छा स्रोत नहीं है. जानी-मानी पोषण सलाहकार और 'गोल्ज-पोषण एवं आहार समाधान' की संस्थापक डॉ. सुषमा अप्पैया के अनुसार, लगभग 50 ग्राम कच्ची दाल पकने के बाद करीब 12 ग्राम प्रोटीन देती है. यानी एक कटोरी दाल से दो अंडों के बराबर के आसपास प्रोटीन मिल सकता है.  इसके अलावा दाल में फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं. 

क्या है दोनों में अंतर?

अंडे और दाल में एक बड़ा अंतर है. अंडे का प्रोटीन शरीर आसानी से अवशोषित कर लेता है, जबकि दाल में मौजूद प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट भी अधिक मात्रा में होता है. इसलिए न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अक्सर संतुलित आहार में दोनों को शामिल करने की सलाह देते हैं. अगर किसी कारण से अंडा नहीं दिया जा रहा है, तो दाल के साथ दूध, दही, पनीर, सोया या दूसरी प्रोटीन युक्त चीजें शामिल करना जरूरी माना जाता है, ताकि बच्चों की दैनिक प्रोटीन जरूरत पूरी हो सके.  भारत के अलग-अलग राज्यों में मिड-डे मील का मेन्यू अलग है. कई राज्यों में बच्चों को सप्ताह में कुछ दिन अंडा दिया जाता है, जबकि कुछ राज्यों में दाल, चना, पनीर, दूध और दूसरी शाकाहारी चीजों के जरिए पोषण देने की व्यवस्था की जाती है. 

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बच्चों के लिए क्या जरूरी?

एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि उन्हें रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स मिलें. अगर अंडे की जगह ऐसा शाकाहारी विकल्प दिया जाता है जो समान पोषण उपलब्ध कराए, तो बच्चों के विकास पर असर कम पड़ सकता है. लेकिन केवल अंडा हटाकर पोषण की भरपाई न की जाए, तो इससे बढ़ते बच्चों की सेहत और शारीरिक विकास प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है.

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