Garud Puran: मंदिर में चोरी करना माना जाता है महापाप! यमलोक में यमराज देते हैं ये भयानक सजा
TV9 Bharatvarsh July 08, 2026 09:43 PM

Temple Theft Sin: देशभर में अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जहां भक्त अपने भगवान के आगे सिर झुकाते हैं और उनके दर्शन करते हैं. साथ ही मंदिर के दानपात्र में श्रद्धा और क्षमतानुसार दान करते हैं. दान के पैसे को मंदिर कमेटी के सदस्य भंडारे और मंदिर की अन्य जरूरतों के हिसाब से उपयोग करते हैं. मंदिरों का पैसा सामाजिक कार्यों में भी उपयोग किया जाता है. सामाजिक कार्यों और दान के पैसों को चोरी करना बहुत ही गलत होता है.

इस समय राम मंदिर में दान की चोरी का मामला चर्चाओं में हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर कोई मंदिर के दानपात्र से चोरी करता है, तो उसकी आत्मा को मृत्यु के बाद यमलोक में यमराज क्या सजा देते हैं? अगर नहीं तो गरुड़ पुराण में इस बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है. गरुड़ पुराण 18 महापुराणों में शामिल है. इसमें मंदिर में चोरी करने को महापाप माना गया है. आइए गरुड़ पुराण के अनुसार, जानते हैं कि मंदिर में चोरी करने वालों को यमराज कौन सी भयंकर सजा देते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार…

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो मंदिर से भगवान के आभूषण और कीमती सामान की चोरी करते हैं, वो पाप के भागी बनते हैं. मंदिर से चीजों और दान के सामान को चुराना महापाप होता है. मंदिर से ईश्वर की प्रतिमाएं, घंटे और दान के पैसे चुराने वालों को यमराज यमलोक में वज्रमहापीड नाम की सजा देते हैं. धर्म न मानने वाली पापी आत्माओं को ये सजा भुगतनी पड़ती है.

वज्रमहापीड सजा क्या होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार, वज्रमहापीड की सजा के दौरान पापी आत्माओं को अत्यंत कठोर पीड़ा होता है. इस सजा में यमराज के आदेश पर यमदूत पापी आत्माओं को लोहे के वज्र (हथियार) से कुचलते और दबाते हैं. इसके साथ वो पापी आत्माओं को लोहे के भारी वज्र से मारते हैं. धर्म के नाम पर छल करने वाली पापी आत्माओं को यमलोक में इस सजा को भोगना ही पड़ता है.

ये भी पढ़ें: Pray Before Eating: भोजन से पहले भगवान को याद करने की परंपरा क्यों है? जानिए इसके पीछे की मान्यता

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी गरुड़ पुराण की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.