कोलकाता, 8 जुलाई: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने West Bengal सरकार को निर्देश दिया है कि वह कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन प्रदान करने की जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना संघ (ISKCON) को सौंपने के प्रस्ताव के संबंध में एक हलफनामा प्रस्तुत करे.
यह सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायाधीश पार्थ सारथी चट्टोपाध्याय की पीठ ने बुधवार को की. कार्यवाही के दौरान, अदालत ने प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी. इस पर राज्य के महाधिवक्ता सूरजित नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि मामला अभी प्रस्ताव के चरण में है, और अब तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है.
इसके बाद, पीठ ने राज्य सरकार को अगले चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता सरकार के हलफनामे के दाखिल होने के दो सप्ताह के भीतर एक प्रतिवाद हलफनामा प्रस्तुत करे.
अतिरिक्त रूप से, अदालत ने यह टिप्पणी की कि प्रस्ताव के खिलाफ याचिका समय से पहले लगती है, क्योंकि राज्य सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है. पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सरकार कोई औपचारिक अधिसूचना जारी करती है, तो याचिकाकर्ता फिर से अदालत का रुख कर सकता है.
इस PIL में तर्क दिया गया है कि यदि ISKCON को कोलकाता के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो अंडे नहीं परोसे जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रोटीन युक्त आहार से वंचित किया जा सकता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि मध्याह्न भोजन तैयारी में वर्तमान में कार्यरत कई महिलाएं अपनी नौकरियां खो सकती हैं यदि यह जिम्मेदारी ISKCON को सौंप दी जाती है.
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