देश में E20 पेट्रोल यानी 20 फीसदी एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार लगातार कह रही है कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है और इससे जुड़ी आशंकाएं महज अफवाह हैं. दूसरी तरफ करोड़ों पुरानी गाड़ियों के मालिक अब भी असमंजस में हैं कि उनकी गाड़ी इस नए ईंधन के लिए बनी भी है या नहीं.
इसी सवाल की तह तक पहुंचने के लिए ABP News ने पड़ताल की. हमारी जांच में तीन ऐसे तथ्य सामने आए जो इस बहस को और गंभीर बना देते हैं.
पहला- दिल्ली के ऑटो पार्ट्स मार्केट में फ्यूल सिस्टम के पुर्जों की बढ़ती मांग.
दूसरा- 2021 की सरकारी रिपोर्ट जिसमें खुद E20 के लिए कई अहम पुर्जों का मटीरियल बदलने की जरूरत दर्ज है.
तीसरा- अरविंद केजरीवाल के दावे की जांच में कई कंपनियों के आधिकारिक ओनर्स मैनुअल में सिर्फ E10 तक की ही मंजूरी मिलना.
ABP News दिल्ली के ऑटो पार्ट्स मार्केट पहुंचा. दुकानदारों और ऑटोमोबाइल इंजीनियरों से बातचीत में सामने आया कि पिछले कुछ समय में फ्यूल पंप असेंबली और फ्यूल फिल्टर की मांग में साफ बढ़ोतरी हुई है. दुकानदारों का दावा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से इन पुर्जों के ऑर्डर आ रहे हैं.
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उनका कहना है कि पेट्रोल पंपों पर अब E20 के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में कई लोग एहतियात के तौर पर पहले ही फ्यूल सिस्टम के पुर्जे बदलवा रहे हैं ताकि आगे चलकर किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.
इंजीनियर सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि एथेनॉल की मात्रा बढ़ने पर सबसे पहले असर इन्हीं हिस्सों पर पड़ने की आशंका रहती है क्योंकि एथेनॉल पुराने किस्म के रबर और प्लास्टिक को धीरे-धीरे कमजोर कर सकता है और नमी सोखने की उसकी क्षमता फ्यूल सिस्टम में दिक्कत बढ़ा सकती है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह चेतावनी कोई नई नहीं है. एथेनॉल ब्लेंडिंग के रोडमैप पर 2021 में आई रिपोर्ट जिसमें ARAI समेत कई तकनीकी संस्थाओं की राय शामिल थी, खुद बताती है कि E10 से E20 पर जाने के लिए पिस्टन रिंग्स, पिस्टन हेड्स, O-रिंग्स, सील्स और फ्यूल पंप जैसे अहम पुर्जों के मटीरियल में बदलाव करना होगा.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियों को अपने इंजन और कंपोनेंट्स को E20 के हिसाब से टेस्ट और कैलिब्रेट करना होगा यानी सरकार की अपनी रिपोर्ट पांच साल पहले ही मान चुकी थी कि E20 के लिए कई अहम पुर्जों का मटीरियल अलग होना चाहिए.
नई गाड़ियों में यह बदलाव कर दिया गया लेकिन सवाल उन करोड़ों पुरानी गाड़ियों का है जो पुराने मटीरियल वाले पुर्जों के साथ आज भी सड़क पर दौड़ रही हैं. अब पार्ट्स मार्केट में बढ़ती मांग भी इसी चिंता की ओर इशारा करती दिख रही है. अब यही मुद्दा सियासी अखाड़े में भी पहुंच चुका है.
अरविंद केजरीवाल ने कर दी ये मांग
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ E10 और E0 यानी बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए ताकि लोग अपनी गाड़ी के हिसाब से ईंधन चुन सकें. उनका आरोप है कि सरकार लोगों के सामने विकल्प खत्म कर रही है.

केजरीवाल ने गाड़ी कंपनियों के ओनर्स मैनुअल का हवाला देते हुए दावा किया कि कई कंपनियां अपने दस्तावेजों में अधिकतम E10 की ही अनुमति देती हैं. उन्होंने Maruti Suzuki, Toyota Kirloskar और Hero MotoCorp से लिखित गारंटी मांगी है कि यदि E20 से गाड़ी के पुर्जे खराब होते हैं या माइलेज 10 फीसदी से ज्यादा घटता है तो कंपनियां उसकी भरपाई करें. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने की भी बात कही है.
केजरीवाल के दावे की ABP News ने की पड़ताल
हमने उदाहरण के लिए 2019 की Suzuki Jimny और 2022 की Toyota Glanza के आधिकारिक ओनर्स मैनुअल की जांच की. दोनों में साफ लिखा मिला कि गाड़ी में ऐसा पेट्रोल इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें अधिकतम 10 फीसदी एथेनॉल हो. Toyota Glanza के मैनुअल में फ्यूल लिड पर E5 और E10 का लेबल भी दर्ज है.
Maruti Suzuki के मैनुअल में भी 'Petrol Ethanol Blends' वाले हिस्से में यही सीमा लिखी मिली. साथ ही एक अहम नोट भी है कि यदि एथेनॉल मिले पेट्रोल से ड्राइवेबिलिटी या माइलेज से संतुष्टि न हो तो बिना अल्कोहल वाले पेट्रोल का इस्तेमाल करें. मैनुअल यह भी कहता है कि रिफ्यूलिंग के दौरान अल्कोहल वाला ईंधन गाड़ी की बॉडी पर गिरने से पेंट खराब हो सकता है और यह वारंटी में कवर नहीं होगा.
ABP न्यूज़ की पड़ताल में क्या आया सामने
ABP News की पड़ताल में इतना जरूर साफ हुआ कि 2019 से 2022 के बीच की जांची गई गाड़ियों के आधिकारिक मैनुअल में E20 का कहीं जिक्र नहीं है और अधिकतम E10 की ही अनुमति दर्ज है. इस हद तक केजरीवाल का दावा दस्तावेजों से मेल खाता है.
पुरानी गाड़ियों को लेकर इंजीनियरों की सलाह भी साफ है. फ्यूल फिल्टर समय से पहले बदलवाते रहें, हर सर्विस पर रबर पाइप, सील और O-रिंग की जांच कराएं, गाड़ी को लंबे समय तक बिना चलाए न छोड़ें और अगर स्टार्टिंग, झटके या माइलेज में असामान्य गिरावट महसूस हो तो तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर पर जांच कराएं.
इंजीनियरों का कहना है कि एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा कम होती है इसलिए माइलेज में कुछ कमी तकनीकी रूप से संभव है. हालांकि समय पर रखरखाव से इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

केंद्र सरकार लगातार कहती रही है कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को अफवाह बता चुके हैं और लोगों से वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करने की अपील कर चुके हैं.
वाहन कंपनियों का भी कहना है कि E20 पुरानी गाड़ियों के लिए सुरक्षित है और माइलेज पर असर सीमित रहेगा. सरकार का तर्क है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल का आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा बचेगी, किसानों को फायदा मिलेगा और प्रदूषण घटेगा.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है. एक तरफ पार्ट्स मार्केट की तस्वीर है दूसरी तरफ सरकार की 2021 की रिपोर्ट और तीसरी तरफ कंपनियों के अपने मैनुअल. तीनों को साथ रखकर देखें तो करोड़ों पुरानी गाड़ियों को लेकर उठ रहे सवाल खत्म नहीं होते. अगर नई गाड़ियों के लिए पुर्जों का मटीरियल बदलना जरूरी था और पुराने मैनुअल सिर्फ E10 की अनुमति देते थे तो करोड़ों पुराने वाहन मालिक यह जानना चाहते हैं कि उनके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प क्या है. जब तक इस सवाल का भरोसेमंद जवाब नहीं मिलता तब तक पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए सतर्क रखरखाव ही सबसे बड़ा सहारा है.