पेट्रोल-डीजल बेचने वाली 3 कंपनियों को तगड़ा झटका! एक तिमाही में 47 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान
TV9 Bharatvarsh July 09, 2026 04:43 PM

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारत की टॉप 3 सरकारी तेल कंपनियों की कमर तोड़ दी है. अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष (2026-27) की पहली तिमाही में इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को कुल मिलाकर 47,700 करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा हो सकता है. हालात ये हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो गया है, लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें उस अनुपात में नहीं बढ़ी हैं. इससे तेल कंपनियों पर दबाव चरम पर है.

कंपनियों का खजाना खाली होने की नौबत

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा और जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीदकर सस्ते में पेट्रोल-डीजल बेचने की वजह से इन कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है. अकेले पहली तिमाही में HPCL को 17,300 करोड़ रुपये, IOCL को 17,200 करोड़ रुपये और BPCL को 13,200 करोड़ रुपये के महा-नुकसान का अनुमान जताया गया है. पिछली तिमाही तक इन कंपनियों को प्रति लीटर कुछ मामूली मुनाफा हो रहा था, लेकिन अब यह मार्जिन गिरकर 20 से 23 रुपये प्रति लीटर के भारी नुकसान में बदल गया है. रुपये की कमजोरी और रिफाइनरी लागत बढ़ने से यह संकट और गहरा गया है. इन तीनों में HPCL की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है क्योंकि इसका रिटेल मार्केटिंग एक्सपोजर सबसे ज्यादा है.

रसोई गैस भी बढ़ा रही है टेंशन

महंगाई की मार सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि रसोई गैस (LPG) ने भी तेल कंपनियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है. मध्य पूर्व में सप्लाई चेन बिगड़ने और सऊदी अरब द्वारा कीमतें बढ़ाने से एलपीजी के दाम वैश्विक स्तर पर काफी बढ़ गए हैं. आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों को प्रति गैस सिलेंडर 560 रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है, जो पिछली तिमाही में महज 77 रुपये प्रति सिलेंडर था. जेएम फाइनेंशियल का अनुमान है कि केवल एलपीजी पर होने वाला यह नुकसान (अंडर-रिकवरी) तेजी से बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है.

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