बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: अनमोल बिश्नोई पर मुंबई पुलिस को फटकार, कोर्ट ने क्यों की सख्त टिप्पणी?
TV9 Bharatvarsh July 11, 2026 02:42 PM

मुंबई की विशेष अदालत ने बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने में मुंबई पुलिस की सुस्ती पर बहुत नाराजगी जताई है. कोर्ट ने पुलिस को साफ निर्देश दिया कि अनमोल बिश्नोई की हिरासत सुनिश्चित की जाए. कोर्ट ने कहा कि कस्टडी लेने के लिए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया, जिसकी वजह से कोर्ट की तरफ से नाराजगी जाहिर की गई.

कोर्ट ने कहा कि पिछले साल प्रत्यर्पण के बाद से अनमोल बिश्नोई NIA की हिरासत में है, इसके बावजूद मुंबई पुलिस ने उससे पूछताछ के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए. विशेष अदालत ने मुंबई पुलिस को निर्देश दिया कि कानून के तहत उपलब्ध सभी जरूरी उपाय अपनाकर अनमोल बिश्नोई की हिरासत लें और उसे अदालत के समक्ष पेश करना सुनिश्चित करें.

‘ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है’

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “किसी गंभीर हत्या के मामले में जांच एजेंसी को उसके वैधानिक कर्तव्यों की याद दिलाना अदालत का काम नहीं है. ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि अदालत को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में निर्धारित प्रक्रिया के पालन और फरार आरोपी की अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित कराने के लिए निर्देश जारी करने पड़ रहे हैं.” बाबा सिद्दीकी की पत्नी ने अपने वकील प्रदीप घरत और त्रिवांकुमार कर्णानी के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी हत्या के पीछे की कथित बड़ी साजिश की जांच करने में विफल रही है.

उन्होंने ये भी कहा कि एजेंसी ने अनमोल बिश्नोई को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में चिन्हित करने के बावजूद जानबूझकर उसकी हिरासत लेने से परहेज किया है. हालांकि, अदालत ने कहा कि वो जांच एजेंसी की मंशा पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन रिकॉर्ड से ये स्पष्ट है कि एजेंसी ने कानून में उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल नहीं किया और इस मामले में उसकी निष्क्रियता साफ दिखाई.

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि अनमोल को मुंबई कोर्ट में फिजिकली नहीं लाया जा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत एक साल का आदेश जारी किया है. इसके मुताबिक, अनमोल को एक साल तक जेल से बाहर नहीं ले जाया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए टाला नहीं जा सकता, जबकि 27 अन्य लोगों के खिलाफ ट्रायल शुरू होने वाला है.

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