भरत तिवारी एनकाउंटर केस: जांच आयोग के सामने माता-पिता का दावा- 'हथियार फेंकने के बाद भी पुलिस ने मारी गोली'
TV9 Bharatvarsh July 12, 2026 03:43 PM

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में शनिवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मृतक के माता-पिता ने न्यायिक जांच आयोग के सामने ऐसे आरोप लगाए, जिससे पूरे मामले ने नया और गंभीर मोड़ ले लिया. पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाले आयोग के समक्ष दोनों ने दावा किया कि भरत ने हथियार फेंक दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी.

भरत तिवारी की मां आशा देवी ने आयोग के सामने कहा कि घटना में एसडीएम, डीएसपी राजेश कुमार शर्मा, इंस्पेक्टर, थानेदार राजेश कुमार मालाकार और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे. उनका आरोप है कि सरेंडर जैसी स्थिति बनने के बाद भी उनके बेटे को नहीं छोड़ा गया और गोली मार दी गई. उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए.

पिता ने बताई पूरी घटना

पिता काशीनाथ तिवारी ने भी सिलसिलेवार तरीके से पूरी घटना आयोग के सामने रखी. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद पूरे परिवार को बिना किसी कानूनी आधार के एक दिन तक थाने में बंद रखा गया. इतना ही नहीं, उनके बेटे का मोबाइल फोन भी अब तक वापस नहीं किया गया है. आयोग ने करीब 2 घंटे तक बारीकी से घटनाक्रम की शुरुआत से पूछताछ की.

अब पुलिस अधिकारियों पर गिरफ्तारी का खतरा?

मामले में 13 जुलाई को भरत की भाभी और 14 जुलाई को भाई की गवाही होनी है. कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि इन बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों से आरोप मजबूत होते हैं, तो जांच में नामजद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है.

आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या), धारा 3(5) (साझा आपराधिक मंशा) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज ह. ऐसे में आने वाले दिनों में यह केस और अधिक संवेदनशील हो सकता है. इन धाराओं में जमानत मिलना भी मुश्किल है.

क्या है पूरा मामला?

17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी. पुलिस का दावा है कि भरत ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.

दूसरी ओर, परिवार शुरू से इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा है. अब न्यायिक आयोग के सामने दर्ज माता-पिता के बयानों ने इस चर्चित एनकाउंटर केस को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है.

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