Bhagalpur News: बिहार के युवाओं के लिए पलायन हमेशा से एक बड़ी मजबूरी रहा है, लेकिन भागलपुर के रहने वाले नन्दिकेश की असाधारण सफलता की कहानी उन हजारों प्रवासियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है. कभी मुंबई जैसे महानगरों में हर महीने मात्र 15 हजार रुपये की पगार पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले नन्दिकेश आज अपने ही शहर भागलपुर में एक सफल उद्यमी बन चुके हैं. वे न सिर्फ सालाना 80 लाख रुपये से अधिक का कारोबार कर रहे हैं, बल्कि दर्जनों लोगों को उनके ही घर में सम्मानजनक रोजगार भी दे रहे हैं.
नन्दिकेश की इस कामयाबी की शुरुआत एक बहुत बड़े संकट और हौसले से हुई थी. कोरोना महामारी के दौर में जब देशव्यापी लॉकडाउन लगा, तो नन्दिकेश भी अन्य प्रवासियों की तरह मुंबई छोड़कर अपने घर भागलपुर लौट आए. विषम परिस्थितियों को देखने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि अब वे दोबारा नौकरी के लिए परदेस नहीं जाएंगे, बल्कि अपनी माटी पर ही कुछ बड़ा करेंगे जिससे खुद आत्मनिर्भर बन सकें.
सरकार से मिली आर्थिक मदद
नन्दिकेश के इस आत्मनिर्भर बनने के सपने को केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना’ (PMEGP) का मजबूत सहारा मिला. इस योजना के तहत उन्हें अपना उद्योग शुरू करने के लिए 25 लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ. इसके साथ ही बिहार सरकार ने भी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बरारी के बियाड़ा (BIADA) औद्योगिक क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराई, जहां नन्दिकेश ने अपनी बैग निर्माण इकाई स्थापित की.

मुंबई की बड़ी कंपनियों से मिल रहे ऑर्डर, ‘डिजिटल बैग’ बना आकर्षण
फैक्ट्री शुरू होने के बाद नन्दिकेश ने उत्पादों की गुणवत्ता और वैरायटी पर विशेष ध्यान दिया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है. नन्दिकेश की बियाड़ा स्थित फैक्ट्री में तैयार होने वाले स्कूल बैग, ऑफिस बैग और ट्रैवल बैग की मांग आज देश के कई राज्यों में बढ़ चुकी है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस मुंबई में वे कभी गार्ड की नौकरी करते थे, आज उसी मुंबई की कई बड़ी नामी कंपनियां नन्दिकेश को हजारों की संख्या में बैग बनाने के थोक ऑर्डर दे रही हैं.
आधुनिक ‘डिजिटल बैग’ का आविष्कार
नन्दिकेश के इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) उनका नया ‘डिजिटल बैग’ है. तकनीक और जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस आधुनिक बैग में इन-बिल्ट मोबाइल चार्जिंग पोर्ट और पावर बैंक कनेक्शन की अनूठी सुविधा दी गई है. इसके जरिए लोग सफर के दौरान बिना अलग से चार्जर निकालने की झंझट के अपना स्मार्टफोन आसानी से चार्ज कर सकते हैं. बाजार में अभी इसका सिर्फ सैंपल ही तैयार हुआ है, लेकिन लॉन्चिंग से पहले ही इसकी प्री-बुकिंग के लिए भारी ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं.
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15 प्रवासियों को वापस बुलाकर दिया रोजगार, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल
नन्दिकेश की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने सिर्फ अपना भविष्य नहीं संवारा, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई. नन्दिकेश की फैक्ट्री में आज 15 से 20 ऐसे कारीगर और कर्मचारी काम कर रहे हैं, जो पहले आजीविका चलाने के लिए दिल्ली, मुंबई या सूरत जैसे शहरों में रहकर मजदूरी करते थे. नन्दिकेश ने इन प्रवासियों को वापस भागलपुर बुलाया और सम्मानजनक वेतन पर अपनी फैक्ट्री में काम दिया, जिससे अब वे अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे हैं.

अपनी इस अद्भुत यात्रा पर बात करते हुए नन्दिकेश बताते हैं कि एक वक्त था जब वे दूसरों के गेट पर 15 हजार की नौकरी करते थे, लेकिन मेहनत, सही सरकारी अवसर और दृढ़ संकल्प ने आज उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है. उनका अगला लक्ष्य बियाड़ा क्षेत्र में अपनी फैक्ट्री का और अधिक विस्तार करना है ताकि वे बाहरी राज्यों में फंसे बिहार के दर्जनों और युवाओं को वापस बुलाकर रोजगार दे सकें. आज उनकी यह सफलता पूरे बिहार के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.