Sawan 2026: पंचमुखी बेलपत्र क्या है? जानें इसका मतलब और शिवलिंग पर चढ़ाने की सही विधि
TV9 Bharatvarsh July 12, 2026 08:44 PM

Panchmukhi Belpatra: इस दिनों आषाढ़ माह चल रहा है. इसके बाद सावन माह शुरू होगा, जोकि देवों के देव महादेव को समर्पित किया गया है. सावन में भगवान शिव संसार के पालनकर्ता का कर्तव्य निभाते हैं. सावन में महादेव की विशेष पूजा और जलाभिषेक किए जाने की पंरपरा सदियों से चली रही है. सावन में शिव भक्त कांवड़ में जलभर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. द्रिक पंचाग के अनुसार, इस साल सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है. इस माह का समापन 28 अगस्त को सावन माह की पूर्णिमा के साथ होगा.

सावन में महादेव की पूजा के लिए किसी खास चीज की आवश्यकता नहीं पड़ती. इस समय भगवान मात्र पंचमुखी बेलपत्र चढ़ाने भर से प्रसन्न हो जाते हैं. महादेव की पूजा में बेलपत्र काफी शुभ माना जाता है. इसको शिवलिंग पर चढ़ाने से जीवन में विशेष लाभ भी मिलते हैं. ऐसे में आइए, जानते हैं कि पंचमुखी बेलपत्र क्या है और इसे शिवलिंग पर चढ़ाने की सही विधि क्या है?

पंचमुखी बेलपत्र क्या है?

तीन पत्तियों वाला बेलपत्र तो आपने देखा होगा, लेकिन पंचमुखी बेलपत्र भी बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना गया है. पंचमुखी बेलपत्र पांच पत्तियों वाला होता है. इस बेलपत्र में एक डंठल में पांच पत्तियां पाई जाती हैं. यही कारण है कि पांच पत्तियों वाला बेलपत्र बहुत मुश्किल से मिलता है. पंचमुखी बेलपत्र का उल्लेख शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है.

तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का मतलब ब्रह्मा, विष्णु और महेश माना जाता है. वहीं पंचमुखी बेलपत्र की पत्तियों को भगवान शिव के पांच मुख सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान का स्वरूप माना गया है. मान्यता है कि जो भी लोग इस बेलपत्र को प्राप्त करके शिवलिंग पर चढ़ाते हैं, उनको महादेव की विशेष कृपा होती है. सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनोकामना भी पूर्ण होती है.

शिवलिंग पर पंचमुखी बेलपत्र चढ़ाने की विधि

पंचमुखी बेलपत्र को पानी से साफ करके ही शिवलिंग पर चढ़ाएं. शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाला पंचमुखी बेलपत्र खंडित नहीं होना चाहिए. पंचमुखी बेलपत्र की पांचों पत्तियों पर अनामिका उंगली से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखें. इसके बाद ही इसको शिवलिंग पर चढ़ाएं. पंचमुखी बेलपत्र को दोनों हाथों से पकड़कर शिवलिंग पर चढ़ाएं. बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाते समय ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप अवश्य करें.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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