Jabalpur News: मध्य प्रदेश में जबलपुर के सबसे बड़े और प्रमुख सरकारी अस्पताल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक बार फिर एक ऐसी दर्दनाक और शर्मनाक लापरवाही सामने आई है. जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अपनी प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और लापरवाहियों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले इस अस्पताल में मानवता को तार-तार करने बाली एक घटना सामने आई है. यहां एक नवजात शिशु का शव गायनिक वार्ड के बाहर रखे डस्टबिन यानि कचरे के डिब्बे में मिला. इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए.
जानकारी के अनुसार मंडला जिले के मकरी गांव से आए एक पीड़ित परिवार ने बताया कि वे अपनी गर्भवती बहू को इलाज के लिए जबलपुर के मेडिकल अस्पताल लाए थे. सोमवार को महिला की सिजेरियन डिलीवरी ऑपरेशन की गई. परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद से ही वे लगातार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से यह पूछते रहे कि लड़का हुआ है या लड़की और बच्चा कैसा है लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी और मामले को टालते रहे. शनिवार को अचानक नवजात का शव वार्ड के पास कूड़ेदान में पड़ा मिला जिसे देख परिजनों के होश उड़ गए. परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल स्टाफ की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण यह घटना घटित हुई है.
अधिकारियों ने आरोपों को बताया झूठइस खौफनाक घटना के सामने आते ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया. हालांकि अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी परिजनों के इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं. मेडिकल प्रबंधन का दावा है कि महिला की स्थिति काफी गंभीर थी. गर्भ में पानी भरने के कारण समय से पहले साढ़े छह माह में ही क्रिटिकल सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ी थी. प्रशासन के मुताबिक बच्चा पूरी तरह विकसित नहीं था और वह मृत ही पैदा हुआ था. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उपचार में कोई कोताही नहीं बरती गई और डस्टबिन में शव मिलने की बात पूरी तरह गलत है.
इलाज में नहीं हुई लापरवाहीघटना को लेकर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ नवनीत सक्सेना ने इस मामले में कहा है कि परिजनों के आरोपों को देखते हुए जांच के लिए पुलिस को सूचना दे दी गई है. पुलिस ने इस मामले में प्रसूता और परिजनों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं. वहीं पूरे मामले मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरविंद शर्मा ने अस्पताल का बचाव करते हुए कहा कि प्रसूता और नवजात के उपचार में किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि परिजनों का यह आरोप बिल्कुल गलत है कि बच्चा डस्टबिन में मिला है.
पुलिस ने पीड़ितों के दर्ज किए बयानघटना के बाद बढ़े आक्रोश और हंगामे को देखते हुए गढ़ा पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया. वही पूरे मामले में गढ़ा पुलिस का कहना है कि आज पोस्टमार्टम कराने के बाद संबंधित डायरी मंडला जिले की अंजनिया थाना पुलिस को भेज दी गई है. मंडला पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम में प्रसूता और उसके परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज करेगी. परिजनों के बयान के बाद ही सही कारणों और सच्चाई का खुलासा हो सकेगा. बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर एक बार फिर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.