क्या खत्म होने वाली है नकली दांतों की जरूरत? शरीर खुद उगा सकेगा अपने दांत!
सोनम July 15, 2026 01:12 AM

How Teeth Can Regrow Naturally: दांत टूट जाए तो हमेशा के लिए खत्म हो गया, अब तक यही माना जाता रहा है. इलाज के तौर पर फिलिंग, इम्प्लांट या डेंचर जैसे विकल्प जरूर मौजूद हैं, लेकिन ये असली दांत की जगह पूरी तरह नहीं ले पाते. अब नई रिसर्च इस सोच को धीरे-धीरे बदल रही है. साइंटिस्ट यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या शरीर खुद अपने दांत और उसे पकड़ने वाली हड्डी को दोबारा बना सकता है.

क्या निकला रिसर्च में?

हाल की स्टडीज यह नहीं कहतीं कि कल से दांत फिर से उगने लगेंगे. लेकिन उन्होंने एक अहम चीज साफ कर दी है कि दांत और उसके आसपास की हड्डी आखिर बनती कैसे है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिसर्च के अनुसार इसका फोकस दांत के निचले हिस्से में मौजूद एक खास टिश्यू पर है, जिसे एपिकल पैपिला कहा जाता है. यहां कुछ स्पेशल स्टेम सेल होते हैं, जो सही संकेत मिलने पर अलग-अलग तरह के सेल में बदल सकते हैं. इनमें CXCL12-पॉजिटिव सेल खास तौर पर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

हड्डी बनाने वाले सेल में भी बदल सकते हैं

जब दांत की जड़ बनती है, तब उस हिस्से में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है. यही स्थिति इन सेल्स को सक्रिय कर देती है. इसके बाद ये दो तरह के जरूरी सेल बनाते हैं, ओडोंटोब्लास्ट, जो डेंटिन बनाते हैं एनामेल के नीचे की कठोर परत और सीमेंटोब्लास्ट, जो दांत को हड्डी से जोड़ने में मदद करते हैं. दिलचस्प बात यह है कि यही सेल कुछ स्थितियों में हड्डी बनाने वाले सेल में भी बदल सकते हैं.

सही तरीके से दांत बनाने लगते हैं

हालांकि, सिर्फ स्टेम सेल होना ही काफी नहीं है, उन्हें सही दिशा में काम करने के लिए संकेत भी चाहिए.  यहां पर Wnt सिग्नलिंग अहम भूमिका निभाती है. जब यह सक्रिय रहती है, तो सेल सही तरीके से दांत बनाने लगते हैं. अगर यह प्रक्रिया रुक जाए, तो सेल गलत दिशा में चले जाते हैं और जड़ का विकास प्रभावित हो जाता है. वहीं TGF-बीटा नाम का दूसरा सिग्नल सिस्टम इस पूरी प्रक्रिया को संतुलित रखने का काम करता है.

डेंटल फॉलिकल पर भी ध्यान

दांत अकेला नहीं होता, उसे थामे रखने के लिए आसपास की हड्डी भी उतनी ही जरूरी होती है. दूसरी स्टडी में वैज्ञानिकों ने डेंटल फॉलिकल नाम के टिश्यू पर ध्यान दिया. यहां मौजूद सेल Hedgehog सिग्नल के असर में काम करते हैं. यह सिग्नल सही समय पर चालू और बंद होना चाहिए. अगर यह ज्यादा देर तक सक्रिय रहे, तो हड्डी बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है. सही संतुलन में ये सेल ऑस्टियोब्लास्ट बनते हैं, जो नई हड्डी तैयार करते हैं.

इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

क्या दांत फिर से उग सकेंगे?

अब सवाल यही है कि क्या भविष्य में दांत फिर से उग सकेंगे? फिलहाल इसका जवाब है, अभी नहीं. यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है. ज्यादातर नतीजे लैब और जानवरों पर किए गए प्रयोगों से मिले हैं. इंसानों पर बड़े स्तर पर टेस्ट अभी बाकी हैं, और लंबे समय तक इसके असर कितने सुरक्षित होंगे, यह भी साफ नहीं है. फिर भी दिशा उम्मीद जगाती है. आने वाले समय में इलाज सिर्फ नकली दांत लगाने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि शरीर को खुद अपना दांत दोबारा बनाने में मदद देने तक पहुंच सकता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.