
विशाखापट्टनम, 16 जुलाई . आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम फिशिंग हार्बर के पास Thursday को समुद्र में मछली पकड़ने निकली एक नाव हादसे का शिकार हो गई. इस दुर्घटना में दो मछुआरे घायल हो गए, जबकि पांच अन्य की जान बाल-बाल बच गई. Police के अनुसार, खराब समुद्री परिस्थितियों के कारण नाव पलट गई थी.
हादसे के समय नाव में सवार सभी सात मछुआरे पलटी हुई नाव के नीचे फंस गए. काफी मशक्कत के बाद उन्होंने नाव को एक ओर धकेला और पास की चट्टानों तक पहुंचने में सफल रहे. इसके बाद मरीन Police ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला.
घटना में घायल हुए मछुआरों थाथा राव और आकाश को इलाज के लिए किंग जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मछुआरों ने बताया कि हादसे में उनकी करीब 2.5 लाख रुपये की नाव और लगभग 2 लाख रुपये के मछली पकड़ने के उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए. उन्होंने Government से आर्थिक सहायता देने की मांग की है ताकि वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकें.
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले ही विशाखापट्टनम तट के पास एक अन्य नाव दुर्घटना में छह मछुआरों की मौत हो गई थी.
दरअसल, 4 जुलाई को गंगावरम तट से करीब 10 समुद्री मील दूर सात मछुआरों को लेकर जा रही एक यांत्रिक नाव पलट गई थी. ये मछुआरे 1 जुलाई को समुद्र में मछली पकड़ने निकले थे और लौटते समय उनकी नाव हादसे का शिकार हो गई. एक मछुआरे को एक व्यापारी जहाज के चालक दल ने बचाकर 6 जुलाई को तट पर पहुंचाया था, जबकि बाकी छह मछुआरों का कोई पता नहीं चल सका.
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने चार दिनों तक व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर 8 जुलाई को अभियान समाप्त कर दिया गया. बाद में राज्य Government ने मृत माने गए छह मछुआरों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की.
इस घटना को लेकर पूर्व Chief Minister और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने Chief Minister एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली Government पर लापरवाही का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि हादसा गंगावरम बंदरगाह से महज 10 समुद्री मील दूर हुआ था, लेकिन परिजनों द्वारा बार-बार मदद की गुहार और एसओएस संदेश भेजने के बावजूद कोई अधिकारी समय पर नहीं पहुंचा. उन्होंने मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की थी.
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डीएससी