आपकी कार E10 है या E20? ऐसे करें चेक, जानें BS4, BS6 और आपकी कार का पूरा कनेक्शन
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 12:43 AM

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के एक फैसले के बाद देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस फिर तेज हो गई है. आयोग ने एक उपभोक्ता की शिकायत पर मारुति सुजुकी को नई E20 कार देने या 20.50 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है. इसी बीच केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार साफ कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल पूरी तरह परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे जुड़ी कई भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपकी कार E10 है या E20 कंप्लाइंट, इसे कैसे पहचानें. साथ ही BS4 और BS6 नियम कब आए, क्यों आए और भारत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल तक कैसे पहुंचा. आइए पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं.

E20 विवाद क्यों शुरू हुआ और रायपुर आयोग ने क्या फैसला दिया?

पूरा मामला रायपुर निवासी डॉक्टर प्रेमराज देब्ता की शिकायत से जुड़ा है. उन्होंने जून 2024 में मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रांग हाइब्रिड खरीदी थी, लेकिन वाहन में बार-बार तकनीकी दिक्कत आने लगी. सर्विस सेंटर ने पेट्रोल में मिलावट की बात कही, जबकि सरकारी जांच में सफेद दही जैसा पदार्थ इथेनॉल बताया गया. इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुजुकी को 45 दिन के भीतर नई E20 फ्यूल पावर्ड कार देने का आदेश दिया. यदि ऐसा नहीं किया गया तो कंपनी को वाहन की कीमत सहित 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे. साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने का भी निर्देश दिया गया. हालांकि डीलरशिप ने आयोग में कहा कि वाहन की खराबी E20 फ्यूल की वजह से नहीं बल्कि बाहरी कारणों से हुई थी और यह वारंटी के दायरे में नहीं आती.

कैसे पता करें आपकी कार E10 है या E20 कंप्लाइंट?

अगर आपकी कार 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी गई है, तो वह नियमों के अनुसार E20 कंप्लाइंट होनी चाहिए. केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से सभी नए पेट्रोल वाहनों को E20 ईंधन के अनुकूल बनाना अनिवार्य किया था. वहीं, 2010 से लेकर मार्च 2023 तक बिकने वाली ज्यादातर पेट्रोल गाड़ियां E10 के हिसाब से डिजाइन की गई थीं, हालांकि कई कंपनियों ने 2023 से पहले भी कुछ मॉडल E20 कंप्लाइंट लॉन्च कर दिए थे. अगर आपको अपनी गाड़ी की जानकारी चाहिए तो सबसे पहले वाहन की ओनर मैनुअल देखें. इसके अलावा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, अधिकृत डीलर या सर्विस सेंटर से वाहन का मॉडल और निर्माण वर्ष बताकर जानकारी ली जा सकती है. कई कंपनियां वाहन के फ्यूल फिलर कैप या स्टिकर पर भी E20 कंप्लाइंट की जानकारी देती हैं.

सवाल- पुरानी गाड़ी में E20 पेट्रोल के नुकसान को कम करने के लिए कार मालिक क्या करें?

जवाब- ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन के मुताबिक, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ज्यादा चिंता BS4 और उससे पहले की गाड़ियों को लेकर है. ऐसी गाड़ियों में जरूरत के अनुसार अच्छे फ्यूल सिस्टम एडिटिव का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे फ्यूल सिस्टम की सफाई और सुरक्षा में मदद मिलती है. इसके अलावा गाड़ी को लंबे समय तक खड़ा न रखें. अगर वाहन 6 महीने, 1 साल या उससे ज्यादा समय तक बिना चले रहता है, तो इथेनॉल की नमी सोखने की प्रकृति के कारण फ्यूल सिस्टम में दिक्कतें आने की आशंका बढ़ सकती है. नियमित रूप से गाड़ी चलाने और समय पर सर्विसिंग कराने से ऐसी समस्याओं का खतरा काफी कम हो जाता है.

सवाल- E20 पेट्रोल के साथ बेहतर माइलेज और इंजन की सेहत बनाए रखने के लिए क्या करें?

जवाब- टूटू धवन के अनुसार, E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों के लिए रेगुलर सर्विसिंग सबसे जरूरी है. सही समय पर इंजन, फ्यूल फिल्टर और फ्यूल सिस्टम की जांच करानी चाहिए. BS4 और उससे पहले की गाड़ियों में जरूरत पड़ने पर फ्यूल सिस्टम एडिटिव का इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही गाड़ी को लंबे समय तक खड़ा रखने से बचें, क्योंकि नियमित इस्तेमाल से फ्यूल सिस्टम बेहतर स्थिति में रहता है. इससे बेहतर माइलेज मिलने के साथ इंजन की लंबी उम्र बनाए रखने में भी मदद मिलती है.

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E10 और E20 पेट्रोल में क्या अंतर है?

E10 का मतलब है पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण, जबकि E20 में यह मात्रा 20 प्रतिशत होती है. भारत ने 2022 में E10 का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था और अब 2025-26 में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण तक पहुंच चुका है. पीआईबी के अनुसार E20 कोई नया ईंधन नहीं है. ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में दशकों से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है. सरकार का कहना है कि E20 से कुछ वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, साफ दहन, कम प्रदूषण और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे कई फायदे भी मिलते हैं.

BS4 और BS6 क्या हैं, कब लागू हुए और क्यों जरूरी बने?

BS यानी भारत स्टेज उत्सर्जन मानक, जिनका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करना है. BS4 पूरे देश में अप्रैल 2017 से लागू हुआ. इसके बाद भारत ने सीधे BS5 को छोड़ते हुए 1 अप्रैल 2020 से BS6 लागू कर दिया. BS6 इंजन और ईंधन दोनों में बड़े बदलाव लेकर आया, जिससे नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट उत्सर्जन काफी कम हुआ. इसके साथ ही बेहतर फ्यूल क्वालिटी, आधुनिक इंजन तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला. E20 की दिशा में बढ़ने से पहले भी सरकार और ऑटो उद्योग ने इंजन तकनीक को नए स्टैंडर्ड के हिसाब से तैयार किया.

क्या BS6 वाहनों में E20 डाल सकते हैं?

हां, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वाहन कब बना है. 2020 के बाद BS6 दौर में बनी ज्यादातर गाड़ियों को E20 ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था. वहीं केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से सभी नए पेट्रोल वाहनों को E20 कंप्लाइंट बनाना अनिवार्य कर दिया. अगर आपकी BS6 कार अप्रैल 2023 के बाद की है, तो उसमें E20 पेट्रोल बिना किसी दिक्कत के इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि शुरुआती BS6 मॉडल के मामले में बेहतर होगा कि वाहन की ओनर मैनुअल, कंपनी की वेबसाइट या अधिकृत सर्विस सेंटर से E20 कंप्लाइंस की पुष्टि कर लें. इससे किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा और निर्माता की सलाह के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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भारत का इथेनॉल सफर कैसे आगे बढ़ा?

भारत ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की थी. 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा हुई और 2006 में कई राज्यों में E5 लागू किया गया. जनवरी 2013 में 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया, लेकिन उत्पादन सीमित होने के कारण मिश्रण करीब 1.5 प्रतिशत पर ही अटका रहा. वर्ष 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के बाद गन्ने के अलावा मक्का और अतिरिक्त अनाज से भी इथेनॉल बनाने की अनुमति मिली. 2021 में नीति आयोग ने E20 का रोडमैप जारी किया और तेल कंपनियों ने नए इथेनॉल संयंत्रों में निवेश शुरू किया. इसके बाद मिश्रण लगातार बढ़ता गया और 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया.

सरकार E20 पर इतना जोर क्यों दे रही है?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार E20 का सबसे बड़ा उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है. सरकार का कहना है कि हर लीटर पेट्रोल में 20 प्रतिशत घरेलू इथेनॉल मिलाने से विदेशी मुद्रा की बचत होती है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का असर भी कम पड़ता है. पीआईबी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में इथेनॉल मिश्रण 2020-21 में लगभग 8.1 प्रतिशत था, जो 2021-22 में 10 प्रतिशत, 2022-23 में 12.1 प्रतिशत, 2023-24 में 14.6 प्रतिशत, 2024-25 में 19.2 प्रतिशत और 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है. सरकार का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध टेस्टिंग, वैज्ञानिक मूल्यांकन और उद्योग की भागीदारी के बाद लागू की गई है.

दुनिया में कहां-कहां इस्तेमाल हो रहा है इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल?

भारत अकेला देश नहीं है जहां इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है. अमेरिका में E10 सामान्य ईंधन है और E15 का दायरा लगातार बढ़ रहा है. ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल उपयोग करने वाला देश है, जहां E27 मानक है और इसे लगभग 35 प्रतिशत तक ले जाने की तैयारी है. जापान भी चरणबद्ध तरीके से E10 अपना चुका है. इसके अलावा कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों ने भी स्वच्छ ईंधन नीति के तहत इथेनॉल मिश्रण को अपनाया है. भारत भी इसी वैश्विक ट्रेंड के तहत ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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