मोबाइल नेटवर्क की इस कमजोरी से ईरान ने खोज निकाली अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन: क्या है SS7?
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 01:43 PM

ईरान ने कथित तौर पर मोबाइल नेटवर्क की एक पुरानी तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाकर मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठेकेदारों की लोकेशन ट्रैक की. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए एसएस7 नेटवर्क प्रोटोकॉल और मोबाइल एड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया. दावा है कि इस तरीके से इराक, बहरीन और अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और होटलों में मौजूद लोगों की लोकेशन पता की गई. यह गतिविधियां अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले और शुरुआती दिनों में देखी गईं. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि डेटा ट्रैकिंग ने हमलों में कोई अहम भूमिका नहीं निभाई. इस बीच साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स ने इसे ईरान की बढ़ती साइबर जासूसी क्षमता का संकेत बताया.

एसएस7 नेटवर्क की कमजोरी का कैसे हुआ इस्तेमाल

फाइनेंशियल टाइम्स ने मोबाइल सर्विलांस मॉनिटर और इस अभियान की जानकारी रखने वाले सरकारी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान ने एसएस7 यानी सिग्नलिंग सिस्टम 7 की कमजोरियों का फायदा उठाया. एसएस7 वही प्रोटोकॉल है जो वर्षों से 2जी और 3जी मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल और मैसेज रूट करने का काम करता है. रिपोर्ट के अनुसार, इसी तकनीक के जरिए विशेष मोबाइल नंबरों पर एसएस7 पिंग भेजकर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि फोन कहां मौजूद है और किस नेटवर्क पर रोमिंग कर रहा है. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट गैरी मिलर ने इसे एक समन्वित ट्रैकिंग अभियान बताया.

होटलों और सैन्य ठिकानों तक पहुंची लोकेशन, एड टेक भी बना हथियार

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने केवल एसएस7 ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली एडवर्टाइजिंग टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया. मोबाइल कंपनियों की रोमिंग व्यवस्था और एडवर्टाइजिंग आईडी के जरिये अमेरिकी सैनिकों और ठेकेदारों की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की गई. मोबाइल सर्विलांस मॉनिटर के अनुसार, बहरीन सहित कई मध्य पूर्वी देशों के नेटवर्क पर बड़ी संख्या में एसएस7 पिंग दर्ज किए गए. दावा है कि इसी दौरान इराक, बहरीन और अन्य स्थानों पर अमेरिकी ठिकानों और होटलों पर हमले हुए, जिनमें कुछ सैनिक और ठेकेदार घायल भी हुए.

अमेरिका में बढ़ी चिंता, कानून बनाने की तैयारी

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर फोर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निकिता शाह ने कहा कि यह घटना ईरान की साइबर क्षमता के और ज्यादा विकसित होने का संकेत देती है. अमेरिकी सांसद रॉन वाइडेन ने कहा कि वह पहले भी विदेशी देशों द्वारा अमेरिकी कर्मियों के मोबाइल ट्रैक किए जाने के खतरे को लेकर चेतावनी देते रहे हैं. रिपब्लिकन सांसद पैट हैरिगन ने सरकारी कर्मचारियों के डिजिटल लोकेशन डेटा की बिक्री रोकने के लिए कानून लाने की बात कही है. वहीं यूएस सेंट्रल कमांड ने कांग्रेस को बताया कि उसे ऐसे खतरों की जानकारी मिली थी और सैनिकों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए गए. हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि यह दावा सही नहीं है कि डेटा ट्रैकिंग ने हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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