समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नोट छापने के बहुत संवेदनशील काम को निजी कंपनियों को देने की कोशिश कर रही है. उन्होंने RBI की कंपनी के टेंडर नोटिस को सोशल मीडिया पर शेयर किया. इस नोटिस में भारतीय नोटों के लिए सिक्योरिटी फीचर्स वाली खास पॉलीमर सब्सट्रेट शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए कंपनियों से ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (रुचि की अभिव्यक्ति) मंगाने की बात कही गई है.इसी बात पर अखिलेश यादव ने सरकार के इरादे पर सवाल उठाए.
सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “क्या अब भ्रष्ट BJP सरकार में करेंसी नोटों का भी प्राइवेटाइज़ेशन होगा?” उन्होंने पूछा, “इस देश के लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि कमीशन लेने का मॉडल इस हद तक गिर जाएगा. अगर देश की करेंसी ही आत्मनिर्भर नहीं है, तो अर्थव्यवस्था और देश कैसे आत्मनिर्भर बन सकते हैं? क्या अब सरकार को भी आउटसोर्स किया जाएगा?”
अखिलेश का सवाल- सरकार का मकसद क्या?भ्रष्ट भाजपा राज में अब नोटों का भी प्राइवेटाइजेशन हो जाएगा क्या? कमीशनख़ोरी का मॉडल इस हद तक गिर जाएगा, देश की जनता ने सोचा न था। जब देश की मुद्रा ही आत्मनिर्भर नहीं होगी तो अर्थव्यवस्था और देश आत्मनिर्भर कैसे होगा? अब क्या सरकार भी आउटसोर्सिंग पर दे दी जाएगी?
इतने बड़े और pic.twitter.com/rvyxRjY5rZ
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 17, 2026
अखिलेश ने कहा, “इतने बड़े और संवेदनशील काम के लिए इतना छोटा और कंजूसी भरा टेंडर निकालने के पीछे क्या सिर्फ औपचारिकता पूरी करने का कोई छिपा हुआ मकसद है? ऐसा लगता है कि इंतजाम पहले ही हो चुका है और ये कवायद सिर्फ दिखावे के लिए है.” UP के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया, “BJP सरकार नहीं है. ये मुनाफाखोरों की पार्टनर है.”
अखिलेश यादव की ओर से शेयर किया गया नोटिस भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने जारी किया था. इसमें भारतीय नोटों के लिए सिक्योरिटी फीचर्स वाली खास पॉलीमर सब्सट्रेट शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए योग्य बोलीदाताओं से ग्लोबल ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ मंगाने की बात कही गई थी. इसमें बताया गया था कि बोलियां 18 अगस्त को खोली जाएंगी.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि BJP कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से वोटर लिस्ट में हेरफेर करती है. इसमें वह अपने समर्थक फर्जी वोटर्स के नाम जोड़ती है और विपक्ष के समर्थकों के नाम हटा देती है.