देश की सरकारी तेल कंपनियां अब एलपीजी (LPG) की बर्बादी कम करने और ईंधन के बेहतर इस्तेमाल के लिए नई तकनीक को बढ़ावा देने की तैयारी में हैं. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक ग्राहकों के बीच लिक्विड LPG ऑफ-टेक सिस्टम को अपनाने पर जोर दे रही हैं. माना जा रहा है कि इस तकनीक से एलपीजी का बेहतर उपयोग होगा और सिलेंडर में बचने वाली गैस की मात्रा काफी कम हो जाएगी.
क्या है लिक्विड LPG ऑफ-टेक तकनीक?आमतौर पर एलपीजी सिलेंडर से गैस वेपर (Vapour) के रूप में निकाली जाती है. इस प्रक्रिया में सिलेंडर के अंदर कुछ मात्रा में एलपीजी बच जाती है, जिससे ईंधन का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता. वहीं, लिक्विड LPG ऑफ-टेक तकनीक में विशेष उपकरणों की मदद से एलपीजी को तरल रूप में निकाला जाता है. इसके बाद वेपोराइजर (Vaporizer) के जरिए इसे गैस में बदलकर उपयोग किया जाता है. इससे सिलेंडर लगभग पूरी तरह खाली हो जाता है और ईंधन की बर्बादी कम होती है.
किन क्षेत्रों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?इस तकनीक का सबसे अधिक लाभ उन उद्योगों को मिलेगा जहां एलपीजी की खपत काफी ज्यादा होती है. इनमें होटल, रेस्तरां, कैटरिंग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, डेयरी, केमिकल उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां शामिल हैं. लगातार और अधिक मात्रा में गैस की जरूरत वाले संस्थानों के लिए यह तकनीक लागत बचाने के साथ-साथ संचालन को भी अधिक कुशल बना सकती है.
कंपनियों और ग्राहकों दोनों को होगा लाभविशेषज्ञों का मानना है कि यदि एलपीजी का अधिकतम उपयोग होगा तो ग्राहकों की ईंधन लागत कम होगी. साथ ही तेल कंपनियों को भी सिलेंडरों में बची गैस को संभालने और दोबारा भरने से जुड़ी चुनौतियों में राहत मिल सकती है. इससे सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ेगी और एलपीजी वितरण व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बनेगी.
ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम कदमभारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में ईंधन की हर बूंद का बेहतर उपयोग करना सरकार और तेल कंपनियों की प्राथमिकता बन गया है. इसी रणनीति के तहत नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ऊर्जा की बर्बादी कम हो और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके. माना जा रहा है कि आने वाले समय में बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के बीच लिक्विड LPG ऑफ-टेक सिस्टम का दायरा तेजी से बढ़ सकता है. इससे न केवल उद्योगों की परिचालन लागत घटेगी, बल्कि देश में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.