NEET-UG का रिजल्ट आने के बाद मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट पाने के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करनी होती है. केवल अच्छा स्कोर हासिल करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही समय पर रजिस्ट्रेशन, कॉलेजों की पसंद भरना, डॉक्यूमेंट्स का वेरीफिकेशन और तय समय पर रिपोर्टिंग करना भी जरूरी होता है. काउंसलिंग राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाती है. हर राउंड में मेरिट, रिजर्वेशन और उम्मीदवार की पसंद के आधार पर सीट अलॉट की जाती है. अगर आप MBBS में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया और जरूरी नियमों को पहले से समझना बेहद जरूरी है.
NEET के बाद ऐसे शुरू होती है MBBS एडमिशन प्रक्रियाNEET-UG में क्वालिफाई करने के बाद ही MBBS में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होती है. सबसे पहले उम्मीदवारों को निर्धारित कटऑफ पूरा करना होता है. इसके बाद काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है. इस दौरान 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, NEET स्कोरकार्ड, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, कैटेगरी सर्टिफिकेट (अगर लागू हो), पासपोर्ट साइज फोटो और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने होते हैं. सभी डॉक्यूमेंट्स सही और वैलिड होना जरूरी है, क्योंकि किसी भी गलती से एडमिशन में परेशानी आ सकती है.
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर होती है काउंसलिंगMBBS सीटों के लिए काउंसलिंग अलग-अलग स्तर पर आयोजित की जाती है. ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और केंद्रीय संस्थानों की सीटों के लिए नेशनल लेवल पर काउंसलिंग होती है, जबकि राज्य कोटा की सीटों के लिए संबंधित राज्य की काउंसलिंग एजेंसी प्रक्रिया पूरी कराती है. इसके अलावा कुछ निजी और डीम्ड विश्वविद्यालय अपनी अलग काउंसलिंग भी आयोजित करते हैं. उम्मीदवारों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स प्राथमिकता के अनुसार भरने होते हैं. यही विकल्प आगे सीट अलॉटमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
मेरिट के आधार पर मिलती है सीटकाउंसलिंग में सीटों का आवंटन NEET रैंक, आरक्षण नियम और उम्मीदवार की पसंद के आधार पर किया जाता है. आमतौर पर पहला, दूसरा और मॉप-अप राउंड आयोजित किए जाते हैं. सीट मिलने के बाद उम्मीदवार को तय समय के भीतर सीट कन्फर्मेशन फीस जमा करनी होती है और आवंटित मेडिकल कॉलेज में जाकर डॉक्यूमेंट्स का वेरीफिकेशन व अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं. अगर कोई उम्मीदवार सीट छोड़ना चाहता है, तो उसे निर्धारित नियमों और समयसीमा का पालन करना होता है.
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वो पिछले वर्षों के कटऑफ को स्टडी करें, कॉलेजों की प्राथमिकता सोच समझकर तय करें, सभी डॉक्यूमेंट्स पहले से तैयार रखें और काउंसलिंग की हर आधिकारिक सूचना पर नजर बनाए रखें.