संसद में पूछे गए एथेनॉल से जुड़े सभी अहम सवाल, जानिए सरकार ने क्या जवाब दिया
TV9 Bharatvarsh July 21, 2026 03:43 PM

पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक इथेनॉल मिलाने को लेकर हर ओर चिंता जताई जा रही है. विपक्षी दल भी इस मसले पर केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं. इस बीच सरकार की ओर से लोगों की चिंताओं को दूर करते हुए कहा गया कि पेट्रोल में 20% से इथेनॉल मिलाने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. साथ ही यह भी कहा कि सरकार को E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद गाड़ियों की परफॉर्मेंस को लेकर अब तक कोई शिकायत मिली है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कल सोमवार को राज्यसभा को बताया कि सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा को मौजूदा 20 फीसदी के स्तर से ऊपर बढ़ाने का अभी कोई फैसला नहीं लिया है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में भविष्य में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का फैसला वैज्ञानिक अध्ययन और इंडस्ट्री के लोगों के साथ बातचीत के बाद ही लिया जाएगा.

‘फैसले से पहले अध्ययन करेंगे’

केंद्रीय मंत्री गोपी ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा, “अब तक सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा को 20 फीसदी से अधिक बढ़ाने का कोई फैसला नहीं किया है.” उन्होंने कहा कि इससे अधिक कोई भी कदम “वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर विस्तृत अध्ययन के साथ-साथ ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के बाद ही” उठाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि भारत ने तय समय से करीब 5 साल पहले ही 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने के लक्ष्य को हासिल कर लिया है. 2 दशकों से भी अधिक समय तक चरणबद्ध तरीके से लागू किए गए इस कार्यक्रम के बाद, औसत इथेनॉल मिश्रण जहां 2013-14 में करीब 1.53 फीसदी था, इससे बढ़कर 2025-26 सप्लाई वर्ष में 20 फीसदी हो गया है.

विदेशी मुद्रा में हुई भारी बचतः गोपी

पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण से भारी बचत की बात करते हुए गोपी ने कहा कि 2014-15 से इस अभियान से विदेशी मुद्रा में 1.97 ट्रिलियन रुपये से अधिक की बचत हुई है, करीब 316 लाख टन कच्चे तेल की खपत कम हुई है, करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका गया और किसानों की अतिरिक्त आय में 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.

इथेनॉल के इस्तेमाल से शिकायत से जुड़े सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार को गाड़ी बनाने वाली कंपनियों, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन या उपभोक्ता समूहों से E20 ईंधन से जुड़े इंजन खराब होने, फ्यूल-पंप से जुड़ी समस्याओं, जंग लगने या पानी के प्रदूषण के बारे में कोई “व्यापक या ठोस शिकायत” नहीं मिली है. हालांकि उसने मीडिया और सोशल मीडिया पर जताई जा रही चिंताओं पर ध्यान दिया. वैज्ञानिक रूप से उनकी जांच भी की है.

केंद्रीय मंत्री गोपी ने कहा कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया गाड़ियां और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें हैं- जिनमें E20 सर्टिफिकेशन से पहले की कई गाड़ियां भी शामिल हैं- जो क्रमशः साढ़े तीन साल और ढाई साल से अधिक समय से E15-प्लस और E19-E20 ईंधन पर चल रही हैं, और इस दौरान “इंजन के खराब होने या गाड़ियों के बंद पड़ने की कोई भी प्रमाणित घटना सामने नहीं आई है.”

‘अब तक किसी नुकसान का जिक्र नहीं’

उन्होंने एक प्रमुख चार-पहिया गाड़ी निर्माता के सर्विस डेटा का हवाला दिया, जिसमें 2025-26 में 2.84 करोड़ गाड़ियां शामिल थी (जिनमें 1.5 करोड़ नॉन-E20 सर्टिफाइड गाड़ी भी थे). इस डेटा में ईंधन से संबंधित किसी नुकसान का जिक्र नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि एक प्रमुख दो-पहिया गाड़ी निर्माता कंपनी ने भी ऐसी ही जानकारी दी है.

माइलेज को लेकर जताई जा रही चिंता के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुराने, E10-डिजाइन वाले गाड़ियों में माइलेज में जो भी कमी आती है, वह “आमतौर पर बहुत कम” (करीब 3-5 फीसदी) होती है, जबकि E20 से अधिक ऑक्टेन और क्लीनर कंबशन मिलता है. उन्होंने आगे कहा कि निर्माता कंपनियां E20 ईंधन का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों पर वारंटी देना जारी रखी हुई हैं.

खाद्य सुरक्षा पर गोपी ने कहा कि 20 फीसदी ब्लेंडिंग के लक्ष्य से खाद्य फसलों की उपलब्धता कम नहीं हुई है, क्योंकि इथेनॉल के लिए केवल अतिरिक्त अनाज का इस्तेमाल किया जाता है- यह अतिरिक्त अनाज पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट और बफर-स्टॉक की जरूरतों को पूरा करने के बाद ही तय किया जाता है. इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले चावल की मात्रा साल 2024-25 में 31.11 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में (30 जून तक) 39.28 लाख टन हो गई, जबकि इसी अवधि में मक्के का इस्तेमाल 2024-25 के 131.18 लाख टन से घटकर 67.87 लाख टन पर आ गया.

उन्होंने कहा कि चीनी और चावल की खुदरा महंगाई पर कोई असर नहीं पड़ा है और इस प्रोग्राम को “वेस्ट-टू-वेल्थ” तरीका बताया.

पानी के इस्तेमाल पर केंद्रीय राज्य मंत्री गोपी ने कहा कि सरकार ने पानी की सस्टेनेबिलिटी को बनाए रखने के लिए इसे बनाया था, जिसमें गन्ने के अलावा मक्के जैसे अन्य फीडस्टॉक भी शामिल किए गए. इथेनॉल उत्पादन में मक्के की हिस्सेदारी 2021-22 में 0 से बढ़कर 2025-26 में करीब 37 फीसदी हो गई.

उन्होंने बताया कि इथेनॉल प्लांट में प्रति लीटर इथेनॉल उत्पादन के लिए 3-5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का प्रयोग किया जाता है, और डिस्टिलरीज को जीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज यूनिट के तौर पर काम करना जरूरी होता है. गोपी ने बताया कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 2025-26 में जून तक 49,577 करोड़ रुपये कीमत का 705.43 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदा. इससे पहले 2024-25 में 73,996 करोड़ रुपये का 1,033.31 करोड़ लीटर और 2023-24 में 48,757 करोड़ का 679.04 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदा गया था.

साथ ही केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि अभी इन कंपनियों के साथ 501 इथेनॉल सप्लायर रजिस्टर्ड हैं. उन्होंने कहा कि चुनिंदा आउटलेट्स पर कम-ब्लेंड या बिना-ब्लेंड वाला पेट्रोल अनिवार्य करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि अलग सप्लाई चेन चलाने से लागत बढ़ जाएगी. इस वजह से पर्यावरण और किसानों की आय को होने वाले फायदे कम हो जाएंगे.

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