
Bengaluru, 21 जुलाई . Bengaluru में सांसदों और विधायकों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे को दूसरी बार समन जारी किया है. उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ टिप्पणियों को लेकर दर्ज एक निजी शिकायत के मामले में कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है.
जज संदीप पाटिल की अध्यक्षता वाली कोर्ट ने कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाद को भी समन जारी किया और दोनों नेताओं को 1 अगस्त को पेश होने का निर्देश दिया.
प्रियांक खड़गे और नलपाद को पहले जारी किए गए समन के संबंध में Police की रिपोर्ट के बाद Tuesday को ये नए समन जारी किए गए.
यह मामला सिद्धापुरा के निवासी तेजस गौड़ा द्वारा दायर एक निजी शिकायत से जुड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया था कि दोनों कांग्रेस नेताओं के बयानों से आरएसएस की छवि खराब हुई है.
शिकायत के अनुसार, प्रियांक खड़गे ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरएसएस के बारे में टिप्पणी की थी, जबकि मोहम्मद नलपाद ने कथित तौर पर एक यू-ट्यूब चैनल पर इंटरव्यू के दौरान संगठन के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए थे.
याचिकाकर्ता का तर्क था कि दोनों नेताओं की टिप्पणियों से आरएसएस की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और उन्होंने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की.
यह दूसरी बार है जब स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में प्रियांक खड़गे और नलपाद को समन जारी किया है. कोर्ट ने अब दोनों नेताओं को आगे की कार्यवाही के लिए 1 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है.
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और आरएसएस के बीच विवाद का मुख्य कारण उनकी यह मांग है कि संगठन खुद को रजिस्टर कराए और अपने वित्तीय कामकाज का खुलासा करे. यह विवाद तब और बढ़ गया जब खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संघ की संस्थागत स्वायत्तता और फंडिंग में पारदर्शिता पर सवाल उठाए.
खड़गे ने मांग की कि आरएसएस अपने रजिस्ट्रेशन की स्थिति, संगठनात्मक ढांचे, आय-व्यय के विवरण और संपत्ति को सार्वजनिक करे. उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि संगठन के रजिस्टर्ड न होने और ‘गुरु दक्षिणा’ के जरिए चंदा इकट्ठा करने से उसे टैक्स और वित्तीय जांच से बचने में मदद मिलती है.
इस टकराव ने तीखी Political बहस छेड़ दी है. खड़गे का दावा है कि उन्हें धमकी भरे फोन आ रहे हैं और उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर दलितों को आरएसएस की विचारधारा के अधीन काम करने के लिए मजबूर किया जाता है.
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एएसएच/डीकेपी