Bhind News: रेप आरोपी को नाबालिग दिखाने का खेल, बनाया फर्जी जन्म प्रमाण पत्र; नायब तहसीलदार समेत 7 पर FIR के आदेश
TV9 Bharatvarsh July 23, 2026 01:43 AM

Bhind News: महाराष्ट्र के ठाणे में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को नाबालिग साबित करने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाने के मामले में मध्य प्रदेश के भिंड जिला न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने प्रथम दृष्टया साजिश और कूटरचना के आरोपों को गंभीर मानते हुए तत्कालीन नायब तहसीलदार सहित सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश सिटी कोतवाली थाना पुलिस को दिए हैं.

न्यायालय के आदेश के अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं, उनमें तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, तत्कालीन पटवारी संजीव शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, तत्कालीन ग्राम सचिव शेर सिंह यादव, तत्कालीन सरपंच राजकुमार दुबे, कल्लू यादव और आशुतोष सिंह यादव शामिल हैं. आरोप है कि इन सभी ने मिलकर आरोपी को नाबालिग साबित करने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की.

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ठाणे में दर्ज है नाबालिग से दुष्कर्म का मामला

जानकारी के मुताबिक, आरोपी विमल यादव भिंड जिले के ऊमरी थाना क्षेत्र के यादवन का पुरा गांव का निवासी है. उसके खिलाफ वर्ष 2025 में महाराष्ट्र के ठाणे में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार, घटना के समय वह बालिग था, लेकिन उसे किशोर साबित करने के लिए उसके पिता उमेश यादव ने अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से फर्जी शपथ-पत्र और जन्म संबंधी रिकॉर्ड तैयार कराए.

जन्मतिथि बदलकर नाबालिग दिखाने का आरोप

मामले में आरोप है कि आरोपी की वास्तविक जन्मतिथि 12 दिसंबर 2006 थी, लेकिन उसे कानून के तहत नाबालिग होने का लाभ दिलाने के लिए दस्तावेजों में जन्मतिथि बदलकर 25 दिसंबर 2007 दर्ज कर दी गई. इसी आधार पर उसे किशोर घोषित कराने की कोशिश की गई.

जांच रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने दिए FIR के आदेश

परिवादकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव भारद्वाज ने यह मामला जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया था. सुनवाई के दौरान 18 मार्च 2026 को अदालत ने कलेक्टर को पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी. जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश होने के बाद अदालत ने पाया कि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं.

इसके आधार पर कोर्ट ने सिटी कोतवाली पुलिस को BNS की धारा 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.

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