Patna News: बिहार की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई नई नीति या परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग के आधिकारिक पत्र में हुई ऐसी स्पेलिंग की गलती है, जिसने पूरे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए. जिस “Bagless Saturday” (बैगलेस शनिवार) का उद्देश्य बच्चों को बिना बस्ते के रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है, उसे विभाग के पत्र में “Backless” लिख दिया गया.
यह मामला शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में गूंजा. मनोनीत विधान पार्षद डॉ. संजीव कुमार सिंह ने सदन में शिक्षा विभाग के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि जिस विभाग पर बच्चों को सही शिक्षा देने की जिम्मेदारी है, वही अपने आधिकारिक दस्तावेज में इतनी बुनियादी गलती कर रहा है. उन्होंने सदन में कहा, “बैगलेस को बैकलेस लिखा गया है. यही शिक्षा विभाग की स्थिति है. मंत्री महोदय भी इसे देख चुके हैं. जब विभाग अपने पत्र तक सही नहीं लिख पा रहा है तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी?”
स्पेलिंग की गलती बनी शिक्षा व्यवस्था पर बहस का मुद्दाडॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल आदेश जारी करने से नहीं सुधरेगी, बल्कि व्यवहारिक फैसलों की जरूरत है. उन्होंने शनिवार की कक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि या तो प्रत्येक वैकल्पिक शनिवार को अवकाश दिया जाए या फिर शनिवार को हाफ-डे रखा जाए. उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यह सिर्फ शिक्षकों की नहीं बल्कि अभिभावकों की भी भावना है. उनका कहना था कि शनिवार को बच्चों पर पूरे दिन पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ नहीं होना चाहिए.
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मुख्यमंत्री ने दिया बड़ा संकेतसदन में उठे इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के हित को ध्यान में रखते हुए फैसला करेगी. उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर शनिवार को फिर से हाफ-डे किए जाने पर निर्णय लिया जाएगा. बीजेपी के नेता नवल किशोर यादव और जीवन कुमार द्वारा उठाए गए इस मुद्दे का जदयू के नीरज कुमार और डॉ. संजीव कुमार सिंह सहित कई सदस्यों ने समर्थन किया. सदस्यों ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार महीने में दो शनिवार अवकाश और दो शनिवार सीमित समय की कक्षाओं का प्रावधान है. ऐसे में बिहार में पूरे दिन की पढ़ाई कराना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा.
Bagless Saturday क्या है?बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में “Bagless Saturday” की शुरुआत की है. इसके तहत शनिवार को छात्र बिना बस्ता स्कूल आते हैं और खेल, कला, स्वच्छता, जीवन कौशल, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं, ताकि पढ़ाई के दबाव के बीच उनका समग्र विकास हो सके.
एक स्पेलिंग, कई सवालसरकारी दस्तावेजों में टाइपिंग की छोटी गलती सामान्य मानी जा सकती है, लेकिन जब वही गलती शिक्षा विभाग के आधिकारिक पत्र में हो और वह भी बच्चों की शिक्षा से जुड़े शब्द में तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभाग अपने दस्तावेजों की गुणवत्ता जांच को कितना गंभीरता से लेता है.
बच्चों को सही वर्तनी सिखाने वाला विभाग यदि अपने ही आदेश में “Bagless” को “Backless” लिख दे तो यह केवल टाइपो नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन जाता है. शिक्षा की गुणवत्ता केवल नई योजनाओं से नहीं, बल्कि विभाग की बुनियादी कार्यशैली और जिम्मेदारी से भी तय होती है.