
New Delhi, 27 जुलाई . अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर Monday को Supreme Court में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) से दो सप्ताह के भीतर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि एसआईटी में एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ-साथ एक फोरेंसिक ऑडिटर या फोरेंसिक विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाए, ताकि वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड की गहन जांच की जा सके. उत्तर प्रदेश Government ने इस सुझाव पर सहमति जताई.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कामत ने अदालत को बताया कि देशभर से श्रद्धालु मंदिर में 100, 500 और हजारों रुपए का दान देते हैं. इन सभी चंदों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए और ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होना चाहिए, ताकि दान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित प्रभावी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि वित्तीय मामलों की प्रकृति को देखते हुए फोरेंसिक विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
यूपी Government की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि Supreme Court के निर्देशों के अनुरूप राज्य Government ने एसआईटी का गठन कर दिया है. उन्होंने बताया कि एसआईटी का नेतृत्व आईजी किरण एस. कर रही हैं. टीम में एक डीआईजी, एक एसपी स्तर के अधिकारी और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि जांच की प्रगति और उसके दायरे पर स्वयं Supreme Court की निगरानी बनी हुई है.
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने देशभर से प्राप्त चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग दोहराई. अदालत ने इस मांग पर विचार करते हुए कहा कि जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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एससीएच/पीएम