प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में मध्य प्रदेश के सीधी जिले का नाम लेकर जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि कैच द रेन अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है और सीधी जिले में जनभागीदारी से किए गए जल संरक्षण के कार्य पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रहे हैं. प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय मंच से जिले का उल्लेख किए जाने के बाद सीधी में खुशी का माहौल है.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘जहां बारिश गिरे, वहीं पानी को सहेजिए’ के संदेश के साथ शुरू किया गया ‘कैच द रेन’ अभियान देशभर में प्रभावी रूप से चल रहा है. उन्होंने बताया कि 4 जुलाई से जल संरक्षण अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण जैसे कार्य तेज गति से किए जा रहे हैं. इस अभियान में पंचायतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी ने इसे एक जन आंदोलन का स्वरूप दे दिया है.
1,489 खेत तालाब बनाए गएप्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सीधी जिले का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां जनसहभागिता से करीब 1,489 खेत तालाब बनाए गए हैं. जिले में अब तक 12,983 जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं. इन प्रयासों से न केवल वर्षा जल का संरक्षण हुआ है, बल्कि भूजल स्तर सुधारने और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिली है.
सीधी जिले में जल संरक्षण अभियान केवल खेत तालाबों तक सीमित नहीं रहा. सोन, गोपद और बनास जैसी बारहमासी नदियों के संरक्षण, सफाई और पुनर्जीवन के लिए भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया. जल स्रोतों की सफाई, नई जल संरचनाओं का निर्माण और वर्षा जल संचयन के कार्यों ने जिले में जल प्रबंधन की एक नई मिसाल पेश की है.
लोगों की सक्रिय भागीदारी का प्रमाणजिला प्रशासन का कहना है कि यह सफलता केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि आम लोगों की सक्रिय भागीदारी का प्रमाण है. पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह अभियान सफल हुआ है. मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से जल संरक्षण के क्षेत्र में लगातार काम किया गया.
प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में सीधी जिले का नाम लिए जाने के बाद जिले में उत्साह का माहौल है. जिला पंचायत के सीईओ शैलेंद्र सोलंकी ने इसे पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान सभी नागरिकों, पंचायतों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि भविष्य में भी जल संरक्षण के ऐसे प्रयास लगातार जारी रहेंगे, ताकि सीधी देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बना रहे.