Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज की पूजा में चूड़ी-मंगलसूत्र रखना क्यों माना जाता है शुभ? जानिए वजह
TV9 Bharatvarsh July 28, 2026 03:43 PM

Hariyali Teej 2026 kab hai: हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. सावन के महीने में मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और पुनर्मिलन से जुड़ा है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए व्रत रखती हैं. साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं. हरियाली तीज की पूजा के दौरान महिलाएं कई तरह की सुहाग सामग्री माता पार्वती को अर्पित करती हैं. आइए जानते हैं हरियाली तीज के दिन माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना इतना शुभ क्यों माना जाता है.

हरियाली तीज 2026 कब मनाई जाएगी?

द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 46 मिनट से शुरू होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीजका व्रत और पूजा 15 अगस्त 2026, शनिवार को की जाएगी.

हरियाली तीज पर क्यों रखी जाती हैं चूड़ियां?

भारतीय परंपरा में चूड़ियों को सुहाग और सौभाग्य की निशानी माना जाता है. खासकर हरी चूड़ियों का सावन और हरियाली तीज से गहरा संबंध है. सावन में प्रकृति चारों तरफ हरे रंग से सजी होती है और इसी वजह से इस महीने में हरे रंग को भी शुभ माना जाता है. हरियाली तीज की पूजा में हरी चूड़ियां रखना या माता पार्वती को अर्पित करना सुहाग और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती को हरी चूड़ियां अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और खुशहाली बनी रहती है. यही कारण है कि हरियाली तीज पर महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं और पूजा की थाली में भी चूड़ियां रखती हैं.

मंगलसूत्र को क्यों माना जाता है शुभ?

मंगलसूत्र को हिंदू धर्म में विवाहित महिला के सुहाग की सबसे प्रमुख निशानियों में से एक माना जाता है. विवाह के समय पति द्वारा पत्नी के गले में मंगलसूत्र पहनाने की परंपरा है. इसे पति-पत्नी के रिश्ते, प्रेम और वैवाहिक बंधन का प्रतीक माना जाता है. हरियाली तीज की पूजा में मंगलसूत्र रखना भी इसी वैवाहिक रिश्ते की मजबूती और पति की लंबी उम्र की कामना से जुड़ा माना जाता है. महिलाएं पूजा के दौरान अपने मंगलसूत्र को माता पार्वती के सामने रखकर उनका आशीर्वाद लेती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती स्वयं अखंड सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं. इसलिए उनकी पूजा करते समय मंगलसूत्र जैसी सुहाग की चीजें अर्पित करने से पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है.

माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करने की मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया. इसी वजह से हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती की पूजा करने और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.

वहीं कुंवारी कन्याएं भी अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से माता पार्वती की पूजा करती हैं. इसी परंपरा के तहत हरियाली तीज की पूजा में चूड़ी, मंगलसूत्र, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल और चुनरी जैसी सुहाग सामग्री रखी जाती है. पूजा पूरी होने के बाद महिलाएं इन चीजों को प्रसाद या माता का आशीर्वाद मानकर अपने पास रखती हैं.

हरियाली तीज की पूजा में क्या रखें?

हरियाली तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू की जाती है. इसके बाद माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है. पूजा की थाली में हरी चूड़ियां और मंगलसूत्र के अलावा सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल, चुनरी और फूल रखे जा सकते हैं. इसके साथ ही माता पार्वती को फल, मिठाई और बाकी पूजन सामग्री अर्पित की जाती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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