चीनी वैज्ञानिकों का दावा- ईरान के हमले में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को US के दावे से ज्यादा नुकसान
TV9 Bharatvarsh July 29, 2026 11:43 PM

चीन के वैज्ञानिकों ने पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्ध को लेकर एक बड़ा दावा किया है. चीनी वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट इमेजरी के जरिए विश्लेषण के आधार पर कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में जमीन पर हुआ नुकसान यूएस और ईरान दोनों के अधिकारिक दावों से अलग है.

चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों को वॉशिंगटन द्वारा बताए गए न्यूनतम नुकसान से कहीं अधिक क्षति पहुंची. हालांकि, ईरान में भी नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.यह अध्ययन चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (CAS) के वैज्ञानिकों ने किया है, जिसे 7 जुलाई को पीयर-रिव्यू जर्नल ‘दी इनोवेशन’ में प्रकाशित किया गया.

रिसर्च टीम ने यूरोपीय संघ के Sentinel-2 सैटेलाइट से प्राप्त 10 मीटर रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरों का इस्तेमाल किया. इन तस्वीरों के जरिए 28 फरवरी से 9 अप्रैल के बीच मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से पहले और बाद की स्थिति का विश्लेषण किया गया.

वैज्ञानिकों ने 2,17,900 वर्ग मीटर क्षेत्र में हुए नुकसान की पहचान की

वैज्ञानिकों ने एडवांस्ड रिमोट सेंसिंग और इमेज प्रोसेसिंग तकनीकों की मदद से कथित तौर पर करीब 2,17,900 वर्ग मीटर क्षेत्र में हुए नुकसान की पहचान की. रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर सबसे ज्यादा असर पड़ा, जहां 20 स्ट्राइक पॉइंट दर्ज किए गए. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के अल धफरा एयर बेस पर भी हमला हुआ, जहां MQ-9 रीपर ड्रोन और U-2 जासूसी विमान रखने वाले हैंगर नष्ट होने का दावा किया गया.वहीं, बहरीन में अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट और यूएस नेवल फोर्सेज सेंट्रल कमांड के मुख्यालय परिसर को भी संरचनात्मक नुकसान पहुंचने की बात कही गई है.

अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इतना वर्ग मीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ था

रिपोर्ट के अनुसार हमले दो प्रमुख चरणों में हुए. ईरान के शुरुआती हमलों में एक ही दिन में करीब 58,600 वर्ग मीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ. इसके बाद लगभग दो सप्ताह तक कम तीव्रता वाले हमले हुए. फिर 15 मार्च के आसपास दूसरी बड़ी लहर आई, जिसमें करीब 50,000 वर्ग मीटर अतिरिक्त क्षेत्र प्रभावित हुआ. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम इतनी जल्दी अपनी क्षमता दोबारा हासिल नहीं कर पाया

चाइनीज सोसाइटी फॉर सर्वेइंग एंड मैपिंग के एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, बड़े टारगेट को नुकसान US के कम से कम नुकसान के दावे से ज्यादा हुआ, जबकि कुल नुकसान ईरान के बताए गए नुकसान के लेवल तक नहीं पहुंचा. हमलों का स्केल बहुत अलग-अलग था, जिसमें लोकल नुकसान से लेकर बड़े पैमाने पर तबाही तक शामिल था. इसके अलावा, हमले लगभग 78-644 KM की दूरी पर किए गए, जिसमें बड़े एरिया में हमले छोटी और लंबी दोनों दूरियों पर हुए.हमलों के एनालिसिस से पता चला कि रीजनल एयर-डिफेंस रेजिलिएंस में टू-वेव कोलैप्स हुआ था.

चीनी वैज्ञानिकों ने क्यों कहा असल नुकसान उनकी रिपोर्ट्स से ज्यादा हो सकता है?

वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि अध्ययन की कुछ सीमाएं भी हैं. 10 मीटर रिजॉल्यूशन वाली सैटेलाइट तस्वीरों के कारण बहुत छोटे स्तर के नुकसान का पता नहीं चल सका. इसलिए असल नुकसान रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों से अधिक भी हो सकता है.

रिसर्च टीम ने यह भी दावा किया कि 4 अप्रैल को अमेरिका ने कुछ व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनियों पर शटर कंट्रोल लागू कर युद्ध क्षेत्र की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों के वितरण पर रोक लगा दी. वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे युद्ध क्षेत्र में सूचना का अभाव पैदा हुआ, जिससे एकदम सटीक नुकसान का आकलन करना मुश्किल हो गया था.

वैज्ञानिकों ने यह भी दावा किया कि US को अपनी एयर-डिफेंस मिसाइलों को फिर से भरने और खराब रडार को रिपेयर करने के लिए समय चाहिए. अमेरिकी सैन्य ठिकानों की कमजोरी पहली बार इतने बड़े स्तर पर उजागर हुई है.

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