लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बन जाएगा कानून
TV9 Bharatvarsh July 31, 2026 01:43 AM

एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पास हो गया है. केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (पेपर लीक रोधी कानून) पेश किया था, जो ध्वनि मत से पारित हो गया. अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद से यह आधिकारिक रूप से कानून बन जाएगा.

राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बार-बार व्यवधानों के बावजूद लगभग 10 घंटे की चर्चा के बाद इसे लोकसभा में पारित किया जा चुका है. उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं, यह विधेयक निचले सदन में पारित हो चुका है. वहां इसपर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया था. बार-बार व्यवधानों के बावजूद इसपर चर्चा हुई और बिल पास हो गया. अब यह विधेयक ऊपरी सदन में आया है’.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की प्रतिक्रिया से साफ है कि वह 2024 के कानून और मौजूदा संशोधन की जरूरत को स्वीकार कर रहा है. उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार लगातार सुधार कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि NTA जैसी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का विचार पहली बार 1992 में सामने आया था और बाद की कई समितियों ने भी इसकी सिफारिश की, लेकिन इसे लागू करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष भी इस पहल की सराहना करेगा.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर बोला हमला

वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केवल सजा बढ़ाने या जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे. उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ सालों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली. उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के आंदोलन और जनदबाव के कारण संशोधन बिल लाना पड़ा.

पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान

इस सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 में पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है. इस विधेयक में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक करने वालों के लिए अधिकतम 10 साल की कारावास और 50 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. वहीं, संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का अधिकार

इस विधेयक में केंद्र सरकार को पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी दिया गया है और साथ ही इसमें एक नई धारा 12ए का प्रस्ताव है, जिसमें दो महीने के भीतर जांच पूरी करने, अधिनियम के तहत अपराधों की दैनिक सुनवाई के लिए सत्र न्यायालयों को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने, आरोप पत्र दाखिल करने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने और प्रत्येक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान है.

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