साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'करण अर्जुन' को आज भी लोग देखना पसंद करते है. हालांकि इसका गाना 'मुझको राणाजी माफ करना' आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है और हर फंक्शन में जरूर बजाया जाता है. हाल ही में इस गाने का 'राणाजी 2.0' रिलीज हुआ, जिसमें माहिरा शर्मा ने परफॉर्म और रेमो डिसूजा ने कोरियोग्राफ किया हैं. इसी बीच अब पुराने गाने में आज आई एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी ने नए वर्जन पर खुलकर बात की हैं.
माहिरा के काम पर बोलीं ममता
हाल ही में वैरायटी इंडिया से बातचीत में ममता कुलकर्णी ने कहा, 'माहिरा ने काम अच्छा किया है, हालांकि इसमें वेस्टर्न स्टाइल को दिखाया गया है. वहीं पुराने गाने में घाघरा-चोली और इंडियन डांस स्टाइल को ध्यान में रखकर शूट किया गया था. पुराना गाना आज भी दिलों में बसा हुआ है, इसीलिए सबसे पहले वही उसी की याद आएगी.'
कोरियोग्राफर ने बदले थे स्टेप्स
वहीं उन्होंने गाने की शूटिंग को लेकर एक किस्सा सुनाया और कहा, 'दो-तीन दिन की प्रैक्टिस के बाद मैंने स्टेप्स सीख लिए थे, लेकिन कोरियोग्राफर चिन्नी प्रकाश ने पूरे स्टेप्स को बदल दिया था. तो मैंने उनसे पूछा कि जब स्टेस्प्स बदलने थे, तो प्रैक्टिस का क्या फायदा? लेकिन वो बहुत अच्छे थे और टाइम पर गाने की शूटिंग भी हो गई थी.'
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निर्देशक की जमकर की तारीफ
इसके अलावा उन्होंने निर्देशक राकेश रोशन की तारीफ करते हुए इतनी बड़ी फिल्म में परफॉर्म करने को लेकर कहा, 'जय मां काली गाने की शूटिंग मुश्किल थी क्योंकि उसमें बहुत सारे डांस थे. हालांकि राकेश जी के साथ सब कुछ हो गया. 'करण अर्जुन' सुपरहिट थी और 'जय मां काली', 'भंगड़ा पा ले' और 'एक मुंडा मेरी उम्र दा' जैसे सभी गानों को दर्शकों ने बहुत पसंद किया.'
बॉलीवुड में वापसी करेंगी ममता
इतना ही नहीं, ममता ने बताया कि वो बॉलीवुड में वापसी के लिए तैयार है. उनका कहना है कि अगर उन्हें कोई ऐसी स्क्रिप्ट मिलती है, जो उन्हें पसंद आए, तो वो जरूर काम करेंगी. लेकिन अब वो 'मुझको रानाजी माफ करना' जैसे गानों पर काम नहीं कर सकती. अब उनके लिए गाने के लिरिक्स जरूरी है.'
ममता की फिल्में
बता दें कि ममता ने अपने करियर की शुरुआत 1991 में तमिल फिल्म 'नानबर्गल' से की थी. हालांकि उन्हें असली पहचान 1992 की 'तिरंगा' और 1993 की 'आशिक आवारा' से मिली. इसके बाद वो 1994 की 'क्रांतिवीर', 1995 की 'करण अर्जुन' और 'सबसे बड़ा खिलाड़ी' और 1996 की 'बाजी' जैसी फिल्मों में काम किया. वहीं 2025 में प्रयागराज महाकुंभ जाकर उन्होंने किन्नर अखाड़े में सन्यास ले लिया और 'यामाई ममता नंद गिरी' के रूप में पहचान हासिल की.
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