आदित्य धर की ‘धुरंधर’ के रिलीज होने के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया है. दो हिस्सों में बनी इस शानदार फ़िल्म ने न सिर्फ कई रिकॉर्ड तोड़कर बॉक्स ऑफ़िस का इतिहास रचा, बल्कि एक कल्चरल फिनोमेनन के तौर पर भी उभरी और इतिहास के पन्नों में अपनी जगह पक्की की. हाल ही में, फिल्म की को-प्रोड्यूसर और जियो स्टूडियोज की CEO ज्योति देशपांडे ने इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को बनाने के मुश्किल सफर के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि कैसे पक्के इरादे ने बार-बार आने वाली चुनौतियों के बावजूद इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया.
कई बार बढ़ा धुरंधर का बजटज्योति देशपांडे ने बताया कि प्रोडक्शन के दौरान ‘धुरंधर’ का बजट कई बार बढ़ा. फिर भी, वह और आदित्य धर डटे रहे क्योंकि उन्हें यकीन था कि वे कुछ बहुत ही खास बना रहे हैं. धुरंधर एक ऐसा प्रोजेक्ट था जिसका बजट कई बार बढ़ा, और मैंने हर बार उसे आगे बढ़ाया. मैंने इसे नए सिरे से तैयार किया. आप जानते हैं, किसी तरह एक हिस्सा दो हिस्सों में बदल गया, लेकिन हमने इसका रास्ता निकाल लिया. उन्होंने कहा कि धुरंधर बनाने को लेकर हमारा इरादा बहुत पक्का था.
पूरी लगन से काम करने का श्रेयदेशपांडे ने टीम के हर सदस्य को प्रोजेक्ट के लिए पूरी लगन से काम करने का श्रेय दिया. उन्होंने कहा कि आदित्य धर और एक्टर रणवीर सिंह, जिन्होंने अपना सब कुछ झोंक दिया और फिल्म बनने के दौरान कोई दूसरा काम नहीं किया. फिल्म से जुड़े हर टेक्नीशियन ने, चाहे वह सिनेमैटोग्राफी हो, साउंड डिजाइन हो या एडिटिंग, अपना पूरा योगदान दिया. हम सब जानते थे कि हम कुछ ऐसा बना रहे हैं जिसका मकसद बहुत बड़ा है, जिसमें बहुत जज़्बात हैं, जो पहले कभी नहीं देखा गया, जो पहले कभी नहीं किया गया.
उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि अगर हमने यह नहीं किया, तो हमारा कोई वजूद नहीं रहेगा. मतलब, हमें हर मुश्किल के बावजूद यह करना ही था. इसलिए इसने हर बाधा को पार किया. मुझे बस आगे बढ़ने का रास्ता ढूंढते रहना था और रुकना नहीं था.
हमें स्टार्स नहीं, अच्छे कलाकार चाहिए थेज्योति देशपांडे ने आगे कहा कि वह ऐसी फिल्म को सपोर्ट करने के लिए तैयार थीं, जैसी दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखी थी. उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसी फ़िल्म को फ़ंड कर रही थी जो बिल्कुल अलग और शानदार सिनेमाई अनुभव वाली थी, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने फ़िल्म के लंबे डेवलपमेंट प्रोसेस के बारे में भी बताया और कहा कि छह महीनों में इसकी स्क्रिप्ट में कई बार बदलाव किए गए. उनके मुताबिक, टीम को पता था कि खर्च किया गया हर रुपया स्क्रीन पर दिखना चाहिए.
‘हमें पता था कि फिल्म महंगी है’देशपांडे ने बताया कि छह महीने से ज़्यादा समय तक हम इस पर बात करते रहे. इन छह महीनों में ड्राफ्ट और कहानी में कई बदलाव हुए. हमें पता था कि फिल्म महंगी है. हर पैसा स्क्रीन पर दिखना चाहिए था. हम कोई रिस्क नहीं ले सकते थे क्योंकि इसकी शूटिंग पहले से ही महंगी थी. अगर हम महंगे एक्टर्स को भी लेते, तो फिल्म पहले दिन ही घाटे का सौदा बन जाती. इसलिए हमें तथाकथित स्टार्स के बजाय अच्छे कलाकार चाहिए थे.
किरदार में ढल जाते हैं रणवीर सिंहज्योति देशपांडे ने यह भी बताया कि लीड रोल के लिए रणवीर सिंह हमेशा उनकी पहली पसंद क्यों रहे. उन्होंने याद किया कि उन्होंने रणवीर के साथ तब काम किया था जब वह बॉलीवुड के इतने बड़े स्टार नहीं बने थे. देशपांडे ने कहा कि मैंने रणवीर के साथ ‘राम-लीला’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ में काम किया था, जब वह इतने बड़े स्टार नहीं थे. मुझे आज भी लगता है कि रणवीर सिंह की वे मेरी पसंदीदा फ़िल्में हैं. मुझे वह एक बेहतरीन एक्टर लगते हैं जो अपना सब कुछ झोंक देते हैं. वह किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं.