8 घंटे की शिफ्ट वाले बयान के बाद दीपिका पादुकोण कम से कम दो साउथ फिल्मों से अलग हो चुकी हैं. वहीं अब फिल्ममेकर वेंकी अटलुरी ने भी इस बात पर अपनी राय रखी है. उन्होंने बताया कि कैसे एक्टर्स और डायरेक्टर्स को अलग-अलग इंडस्ट्रीज के साथ काम करना चाहिए. अपनी फिल्म ‘विश्वनाथ एंड सन्स’ को प्रमोट करते हुए वेंकी ने कहा कि किसी नई इंडस्ट्री में काम करने से पहले वहां के काम करने के तरीके को समझना चाहिए और फिर उसके हिसाब से खुद को ढाल भी लेना चाहिए.
अटलुरी ने कहा कि मैं कम से कम तीन महीने का ब्रेक लूंगा. मैं सेट्स को समझूंगा. एक बहुत पुरानी और आसान कहावत है; ‘जब रोम में हों, तो रोम वालों जैसा करें’. यही बात तेलुगु सिनेमा में आने वाले हिंदी एक्टर पर भी लागू होती है. जब आप तेलुगु में आते हैं, तो आपको तेलुगु सोच-समझ के हिसाब से काम करना होता है.
क्या बोले फिल्ममेकर वेंकी अटलुरी?फिल्ममेकर ने कहा कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री काम के एक अनुशासित शेड्यूल का पालन करती है. उनका कॉल टाइम सुबह 7 या 8 बजे के आसपास होता है, और काम शाम 6 बजे तक चल सकता है. उन्होंने बताया कि एक्टर्स सेट पर लगभग 10 घंटे बिता सकते हैं, जबकि पूरी शूटिंग 11 से 12 घंटे तक चल सकती है. ये टाइमिंग हमेशा फिक्स नहीं होती, क्योंकि अलग-अलग शेड्यूल और विकल्पों पर बातचीत की जा सकती है.
जब किसी भी इंडस्ट्री – चाहे वह तमिल, मलयालम या हिंदी हो – का कोई व्यक्ति तेलुगु फिल्म में आकर काम करता है, तो यहां के काम के कल्चर को समझना और शायद उस कल्चर का सम्मान करना जरूरी होता है.
इंडस्ट्री के तरीकों से करना होगा काम‘मैं बॉलीवुड के काम करने के तरीकों के हिसाब से काम करूंगा. मैं उन तरीकों को सीखूंगा. मैं बस सीधे आकर यह नहीं कहूंगा कि मैं 8 बजे शुरू कर रहा हूं और हर कोई 8 बजे तक यहां आ जाए. मैं कल्चर और 24 तरह के कामों (क्राफ्ट्स) के काम करने के तरीकों को समझूंगा. उसके बाद ही मैं काम शुरू करूंगा.
14 अगस्त को रिलीज होगी ‘विश्वनाथ एंड सन्स’वेंकी अटलुरी की ‘विश्वनाथ एंड सन्स’, जिसमें सूर्या, रवीना टंडन और ममिता बैजू हैं, 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. मां बनने के बाद काम के दिन में 8 घंटे की मांग को लेकर दीपिका पादुकोण प्रभास की फिल्म ‘स्पिरिट’ और ‘कल्कि 2898 AD’ के सीक्वल से अलग हो गई थीं.